एक बार ये सोच कर सो गई मैं रात को
कैसे बयान करे गौ माता अपने अंदर के दर्द को
तभी रात को सपने मे किरणो की रोशनी आई
सपने मे मुझको दिखी गौ माता की परछाई
कहा उन्होने मुझसे देने आई तुझे जवाब
इंसानो ने कर दिया आज मुझे बर्बाद
एक समय था जब मे हर जगह पुजी जाती थी
कितनी सुन्दर खुशहाल सुनहरी हमारी बस्ती थी
लेकिन आज का ये मानव ममता को मेरी खा गया
मेरे मन को कितनी गहरी चोट वो पहुँचा गया
कोई इतना खुदगर्ज जाने केसे हो सकता है
किले चुभोता है उसको जिसके दुध से बढता है
मैने तो इंसानो का भला हमेशा ही किया
फिर आज उसने बेदर्दी से मेरा क्युँ कत्ल किया
आज के इस संसार मे दम मेरा तो घुटता है
मेरे प्यारे कान्हा का युग मुझे याद आता है
आज के इस संसार मे कोई नही है मेरा
दूध देती हूँ इसलिए क्योकी है धर्म ये मेरा
मेरा चमङा काट कर मानव तो इतना खुश हुआ
कैसे समझे उसकी माँ को तब कितना है दर्द हुआ
खोलता पानी ङालकर मुझे कितना तङपाता है
इससे मेरा नर्म चमङा उसको जो मिल जाता है
काट कर मेरा गला उल्टा मुझको लटकाएगा
ताकि उससे खून मेरा बाहर युँ बह जाएगा
बोल नही सकती मैं सिर्फ चिल्लाती ही रहती हूँ
अपने उस चिल्लाने मे मैं दर्द अपना ये कहती हूँ
विनती है उनसे जो चाहे प्राण ना मेरे जाए
मेरे चमङे कि चीजे उपयोग मे ना वो लाए
कुछ इंसान है एैसे जो ना चाहे फिर भी शामिल है
मेरा कत्ल तो ना किया पर फिर भी मेरे कातिल है
व्यथा को मेरी देख कर कुछ कर देते है अनदेखा
भीख दे रहे हो जैसे रोटी का टुकङा है फेंका
बहुत कम खिलाते खाना गौ शाला मे आकर
बाकी तो मैं मर जाती प्लास्टिक कि थैलिया खाकर
दर-दर भटकती रहती हूँ खाने को कुछ मिल जाए
या पानी पी लेती हूँ जीवन तो कुछ बच जाए
मेरा दूध पीकर इंसानो ने इतना बल पाया
उस बल को उन्होने मेरा कत्ल करके है आजमाया
मेरे बच्चे हल जोते और अन्न मिले तुम्हे खाने को
फिर भी तुम मरे जाते हो उनको अनाथ बनाने को
माँ का चमङा बिके यहाँ वाह रे वाह क्या बात है
इंसानो कि सोच एैसी जीवन सबका बर्बाद है
गौ माता कि देख व्यथा दु:ख तो मुझको बहुत हुआ
गौ माता के साथ मे सबका जीवन है हुआ धुँआ
गौ माता के साथ मे सबका जीवन है हुआ धुँआ
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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