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संदेश

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शिक्षक दिवस

आज शिक्षक दिवस है आज के दिन प्रत्यक्ष रूप से जो शिक्षक है उनका सम्मान किया जाता है और यह संदेश दिया जाता है कि जिनसे आपको शिक्षा प्राप्त होती है उनका सदैव सम्मान किया जाना चाहिए और यह संदेश हमे नम्र बनाता है। मैं कहना चाहूंगी इस दिवस से सीख लेकर हमे उन सभी शिक्षको का सम्मान करना चाहिए जो अप्रत्यक्ष रूप से भी हमे शिक्षा देते है अर्थात हमे प्राणी मात्र का सम्मान करना चाहिए। यहाँ उपस्थित प्रत्येक विद्यार्थी किसी के लिए शिक्षक है तो प्रत्येक शिक्षक एक विद्यार्थी भी है। हम उम्र के किसी भी पड़ाव पर पहुँच जाए पर यदि हम विद्यार्थी बने रहे तो ही हम किसी के लिए शिक्षक बन पाएंगे। 

दादीजी की डिब्बी- संस्मरण

दादी, नानी की कहानियाँ तो हर किसी के जीवन मे होती है। वैसे ही एक छोटा सा हिस्सा मेरे जीवन का भी है जो अचानक याद आ गया तो सोचा आप सभी से साझा करूँ।                 बात कुछ ऐसी है की घर के जो बुजुर्ग होते है उनके आगे घर का हर सदस्य बच्चा ही होता है। फिर वह कितना ही बड़ा क्यो न हो।         हमारे घर मे भी 10 से 11 लोग है जिनमे बच्चे भी है उनके माता-पिता भी है और हम सबसे ऊपर दादीजी है। हमारे दादीजी, घर के मुख्य कमरे में रहते है। उनके पलंग पर पूरे घर का स्वास्थ्य संसार बसा होता है। हर दर्द की दवा होती है उनके पास और हर समस्या का समाधान भी।     पलंग पर वही कोने में हमारी दिनचर्या का सबसे बड़ा खजाना रखा होता है जिसमे घर के हर सदस्य का हाथ जाता है लेकिन हाँ पूछकर......। वैसे तो अब तक दादीजी ने हमारी हर बड़ी जरूरतों को भी पूरा किया है पर छोटी-छोटी जरूरते जिनसे छोटी-छोटी खुशी मिलती है उसका निदान है दादीजी की डिब्बी...।     अब बताऊँ उस डिब्बी में होता क्या है? उसमें होते है बहुत सारे सिक्के 1 के, 2 के, 5 के, 10 के। हम सभी ...

ओए तू कब फोन करेगी?? - संस्मरण

दोस्ती क्या होती है, यह हम सभी महसूस करते है। दोस्तो के साथ बिताए पलो में कुछ पल ऐसे भी होते है जो हम कभी भूलते नही और जब भी याद करते है दिल मे खुशी और चेहरे पर हँसी पाते है। ऐसा ही एक वाकया है मेरी जिंदगी का जो मुझे हमैशा याद रहेगा।      सुबह हो चुकी है, जैसे हर दिन शुरू होता है आज भी शुरू हुआ। मुझे सुबह जल्दी उठकर खुली हवा में जाना बहुत सुकून देता है तो उस सुकून के साथ मे थोड़ी सेहत भी अवेर लेती हूं और थोड़ा योग कर लेती हूं।                                  बस आज भी मेरा यही नियम रहा और मैं योग करने छत पर गयी। योग करने बैठी ही थी कि मेरी सहेली का फोन आया- कितनी देर से राह देख रही हूँ तेरे फोन का कब करेगी? तुझे याद भी है या भूल गयी? मैं ही हर बार फोन करके याद दिलाऊँ की आज मेरा जन्मदिन है। वो एक ही सांस में सब ऐसे बोल दी इतनी सांस तो में अनुलोम विलोम में भी नही खिंचती। मैंने कहा- अरे हाँ मैं फोन करने ही वाली थी और तेरा फोन आ गया तुझे भी शांति नही है है ना। वो बोली- कैसे शांति रखु सबके मेसेज...

स्टेटस डालने की जल्दी- संस्मरण

मेरी शादी को अभी कुछ ही महीने हुए थे।  काम से निपट कर मैं बेठी। मैंने मोबाइल हाथ में लिया और व्हाट्सएप पर स्टेटस देखने लगी। तभी मेरी एक सहेली के स्टेटस पर मैंने देखा उसकी खुद की फोटो डाली है और नीचे लिखा है ॐ शांति.....। मैं चौक गई ! मैंने सोचा, अरे ! ऐसा कैसे यह कैसे हुआ? मेरे कुछ समझ नहीं आया। इतनी देर में मेरी दूसरी सहेलियों के फोन आने लगे यह क्या हुआ?  मैंने उनके नंबर पर फोन किया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। मैंने बार-बार फोन किया पर कोई जवाब नहीं आया।  अचानक से किसी सहेली के स्टेटस पर उसके मरने की खबर आ जाए तो इंसान की क्या हालत होगी???? जबकि कुछ ही दिन पहले आपकी उससे बात हुई है। अचानक ऐसा क्या हुआ? मुझे समझ नहीं आया मैं क्या करूं? फिर मुझे ध्यान आया की उनके गांव में उनके घर के पास मेरे साथ पढ़ाने वाली एक मैडम का घर भी है।  मैंने उनको फोन किया उन्होंने भी फोन नहीं उठाया। मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था क्या करूँ??   फिर दोबारा मैंने उनको फिर फोन किया उन्होंने फोन उठाया तो पीछे से ढोल की आवाज आ रही थी मैं फिर घबरा गयी यह ढोल किस बात पर बज रहा है?...

smart बनिये फुद्दू नही

*Smartness का जमाना है तो smart बनिये फुद्दू नही* 8 घण्टे की ऊर्जा में 10 घण्टे काम करो जिससे वह काम 12 घण्टे में होता है इसके बजाय 12 घण्टे की ऊर्जा बनाओ जिससे 10 घण्टे का काम 8 घण्टे में हो। 6 घण्टे मेहनत करके दिमाग थक जाता है फिर उस थके हुए दिमाग को घिसो इसके बजाय दिमाग को स्वस्थ बनाओ और सारा दिन दिमाग चलाकर भी दिमाग को स्वस्थ रखो। 24 घण्टे में से स्वास्थ्य बस आधे से एक घण्टा मांगता है तो आलस या काम का नाम लेकर वो समय खाकर *फुद्दू* मत बनिये बल्कि आधे से एक घण्टा invest करके सारा दिन ऊर्जावान रहकर *smart* बनिये। योग करो भाई योग करो, योग करो बेन योग करो, योग से होगी सेहत स्वस्थ, मौज करो फिर मौज करो। योग करो योग का गणित

ये कैसी बीमारी है? - संस्मरण

आजकल अजीब तरह की बीमारियां होती है, जिससे हमारे शरीर मे होने वाले छोटे से बदलाव से भी हम घबरा जाते है। ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ...... एक दिन ऐसे ही मैं बैठी थी। तभी अचानक मेरी नजर मेरे नाखूनों पर गयी। मैंने देखा वो थोड़े मैले से हो रहे है। मैं घबरा गई मैंने सोचा अरे ! ये क्या? ये मेरे नाखूनों को क्या हो गया है? मुझे इतना तो पता था कि नाखून का मैला होना किसी बीमारी का संकेत है। लेकिन कौन सी?  बस फिर क्या था काम से फुर्सत मिलते ही मैंने गूगल पर खोजना शुरू कर दिया......। हे भगवान! ये क्या ???? अरे! ये मुझे क्या हो गया????? इतनी सारी बीमारी; लेकिन मुझे इनमें से कौन सी हुई है?? इन बीमारियों के लक्षण; ये, हाँ ये तो मुझे हो रहा है, हाँ ये भी तो हो रहा है, अरे! ये भी तो हो रहा है। हे भगवान! क्या करूँ? किसी को बताऊँ या नही ?? ओह्ह ! कुछ समझ नही आ रहा क्या करूँ?? ऐसा करती हूँ अभी शुरुआत है तो पहले घरेलू उपाय करके देखती हूँ शायद इससे ठीक हो जाये और किसी को बताना भी ना पड़े। फिर 2 दिन घरेलू उपाय कर मैंने फिर नाखून देखे। अरे! ये तो अब भी वैसे ही है। हे भगवान! क्या करूँ? सबको बता दूँ और डॉ को दिखा ...

बच्चों का विज्ञान- संस्मरण

हमने विज्ञान की मोटी मोटी किताबे पढ़ी होंगी.....लेकिन बच्चों का जो विज्ञान होता है वो अलग ही दिशा में चलता है जिसका ना अर्थ होता है और ना तर्क, लेकिन हां उसे व्यर्थ नही कह सकते.....। एक बार की बात है मैं मेरी भतीजी चकोर से जो कि 5 साल की है वीडियो कॉल पर बात कर रही थी। वही पास उसकी एक सहेली भी बैठी थी वो दोनो गेंद से खेल रहे थे। हम बात कर रहे थे की खेलते-खेलते चकोर की सहेली बोली, यार चकोर मैं गेंद को ऊपर उछालती हूँ ये वहाँ रूक क्यो नही जाती वापस नीचे कैसे आ जाती है?? उसकी बात सुनकर मैं विचार कर ही रही थी कि इतने छोटे बच्चों को गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार समझाया जाए???? तभी चकोर बोली अरे पागल ऊपर कोई पकड़ने वाला नही होता ना इसीलिए गेंद वापस नीचे आ जाती है......। मैने कहा वाह!! मतलब बच्चों को अपने सवालों के जवाब आप ही ढूंढना आता है। मैने समझा बच्चों के दिमाग को जब तक बचपना है तब तक तो किसी विज्ञान की जरूरत नही है क्योंकि वो किसी का विज्ञान समझ नही सकते और ना कोई बच्चों का विज्ञान समझ सकता है।

व्हाट्सअप डीपी - संस्मरण

ये बात उस समय की है जब मेरी सगाई हुई थी....... सगाई से शादी के बीच करीब एक साल का समय रहा। अब आप तो समझते ही होंगे कि सगाई से शादी के बीच प्यार के साथ-साथ नोक-झोंक भी उतनी ही होती है। अब बात कुछ यूं थी कि हमारी नोक-झोंक झगड़े में बदल गयी और झगड़े का नतीजा ये रहा कि हम दोनों ने अपनी व्हाट्सअप प्रोफाइल (डीपी) हटा दी.....। अब ये जब मेरे परिवार ने मेरा और इनके इधर इनका मुड़ परिवार वालो ने भांप लिया...फिर सबकी नजर व्हाट्सअप प्रोफाइल पर पड़ी जिसे खाली देखकर सभी को पता लग गया कि हमारा झगड़ा हुआ है....परिवार वालो ने हमारे बीच मे पड़ने की बजाय कुछ दिन इंतजार करने का निर्णय लिया.....कुछ दिनों तक सभी की नजर हमारी व्हाट्सअप प्रोफाइल पर रही.....फिर कुछ 3,4 दिनों के बाद जब हमारे बीच सुलह हुई... हमने अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदली....सबने देखी......तब कही जाकर सभी ने चैन की सांस ली। एक प्रोफाइल पिक्चर ने सारी परिस्थिति गढ़ दी...। 😀😀😀😀😀😀😀

ब्राह्मण

यदि हम पुराणों में लिखी इस बात को स्वीकारते है कि ब्राह्मण जाति सबसे उच्च है तो हमे यह भी स्वीकारना चाहिए कि ब्राह्मण के कर्तव्य अन्य जाती से कठिन व सजा सभी जातियों में सबसे कठोर है। पुराणों में ब्राह्मण को उच्च जाति कहा गया यह सोचकर पुराणों के विषय मे गलत विचार लाने की बजाय यह जानने की कोशिश करे कि ऐसा क्यो???? अधूरा ज्ञान सर्वदा विनाशक है...। @@@@@@@@@@@@@@@@@ यदि आप मानते हो कि हम ब्राह्मण है  हमारी जाती सबसे उच्च है, तो यही  समय है जब आप ब्राह्मण के कर्तव्यों  को नजदीक से जानकर उन पर अमल  करना शुरू कर दो। @@@@@@@@@@@@@@@@@ किसी पुराण में पढ़ा था कि मूर्ख व अपने कर्तव्यों से विमुख ब्राह्मण को दिया गया दान व्यर्थ है...। अर्थात ब्राह्मण को उच्च जाति का दर्जा क्यो दिया गया? यह समझना अति आवश्यक है।

वास्तविक दान व उससे मिलने वाला सुख- लघुकथा

 भिक्षां देहि... भिक्षां देहि.....  साधु ने दो बार आवाज लगाई लेकिन कोई बाहर नहीं आया किंतु इस घर से उन्हें रोज भिक्षा मिलती है तो उन्होंने सोचा एक बार और आवाज लगाऊँ भिक्षां देहि..... फिर भी कोई बाहर नही आया तो वो साधु जाने लगे इतने में एक व्यक्ति झल्लाकर बाहर निकला और बोला क्या है? साधु विनम्रता से बोले- क्या बात है बेटा बड़े दुःखी दिखाई देते हो? चिंता मत करो ईश्वर सब ठीक करेंगे..। वो व्यक्ति फिर झल्लाया और बोला- कौन ईश्वर? कैसे ईश्वर? कहाँ के ईश्वर? मैंने ईश्वर में मानना छोड़ दिया है बहुत भक्ति कर ली कुछ नही मिला अब और नही। मैंने अभी अभी हिसाब लगाया साल भर में मैंने जितना दान दिया उसका दुगुना होकर मुझे मिलना चाहिए था लेकिन आधा भी नही मिला। साधु हँसे और बोले- बेटा.... तुमने सालभर कितना दान किया है उसका नही कितना धन व्यर्थ किया है उसका हिसाब लगाया है क्योकि फल उस दान का मिलता है जो श्रद्धा व निःस्वार्थ भाव से दिया गया हो पर तुमने तो एक एक रुपये का हिसाब लगाया है और बदले में दुगुना मिला या नही उसकी गिनती भी कर रहे हो तो तुम्हारा दान तो व्यर्थ हुआ ही समझो..। वह व्यक्ति बोला- अच्छा ...

लघुकथा- ताकत

दो व्यक्ति आपस में बातें कर रहे थे... पहला बोला- यार मुझे आम बहुत पसंद है लेकिन आम गर्मी में ही क्यों आते हैं????? तो दूसरा आसमान की तरफ उंगली दिखा कर बोला-  बेटे हमारे पास टेक्नोलॉजी कि वो ताकत है जिससे हम प्रकृति को बदल सकते हैं और 12 महीने आम खा सकते हैं....। इतने में ही जोर की बिजली कड़की और झमाझम बारिश होने लगी।   पहला बोला- बिन मौसम बरसात यार कैसे और क्यो???  इतने में दो बड़े-बड़े ओले उनके सिर पर गिरे और आवाज आई - "बेटे तुमने मेरी तरफ उंगली दिखा कर ताकत की बात की तो सोचा मैं भी तुम्हें अपनी ताकत दिखा ही दूं...। संदेश-  इंसान टेक्नोलॉजी के नाम पर इतरा कर जो प्रकृति से टक्कर ले रहा है ना... यह भविष्य में बहुत भारी पड़ेगा क्योंकि प्रकृति और भगवान से बड़ी ताकत ना थी, ना है और ना होगी।

विज्ञान....

किसी को कहते सुना की आज विज्ञान के कारण हमें बड़ी बड़ी बीमारियों का पता चला वरना पहले के लोग तो जान ही नही पाते थे। तो एक बात समझ में नही आयी की पहले के लोग जब जानते नही थे फिर भी 90 से 100 साल हष्ट पुष्ट जी जाते थे और आज की हालत तो आप जानते ही है। आज विज्ञान ने बीमारियों का पता तो लगाया पर ये बीमारियां क्यों हो रही है इसके बारे में पता नही लगाया? या यु कहु इन बीमारियों का फिर वह छोटी हो या बड़ी उनका कारण भी विज्ञान ही है। आज हम चाँद तक तो पहुँच गये पर ये भूल गए की हम रहते तो पृथ्वी पर है जहाँ हवा में उड़ना सम्भव नही फिर वह शारीरिक तौर पर हो या मानसिक तौर पर।  हमने तरक्की के नाम पर अपनी आदते इस हद तक बिगाड़ ली है कि अब उन्हें सुधारना हमारे स्वयं के वश में भी नही रहा। विज्ञान की तरक्की के नाम पर हम अपनी आँखों में चकाचौन्ध बढ़ाते जा रहे है और देखना भूल रहे है की उस चकाचौन्ध के पीछे का अँधियारा हमारे जीवन को घेर रहा है, वह जीवन जिसके पीछे ही हम है।  विज्ञान की तरक्की गलत है मैं यह नही कहती क्योकि मैं भी नवीनता (crativity) में विश्वास रखती हूँ किन्तु नवीनता में हम इतने भी ना खो जाए की ह...

गरिमामयी पद- प्रत्यक्ष गरिमा

आप किसी रॉकस्टार से कहो कि जनता के सामने साधारण कपड़ों में जाओ तो वह कहेगा नहीं, यह मेरी शान के खिलाफ है।      आप किसी शिक्षक से कहो कि बच्चों के सामने बंदरों जैसी हरकतें करो तो वह कहेगा नहीं, यह मेरी शान के खिलाफ है।       आप किसी नेता से कहो की जनता के सामने नाचे गाएँ तो वह कहेगा नही, यह मेरी शान के खिलाफ है।        आप किसी जोकर से कहो की सबके सामने गम्भीर रहो तो वह कहेगा नही, यह मेरी शान के खिलाफ है। इनके अतिरिक्त और भी कई ऐसे पद हैं जिनकी विशेष गरिमा होती है, जो प्रत्यक्ष होती है। हर कोई अपने पद की प्रत्यक्ष गरिमा को बनाए रखने के लिए कई बार अपनी इच्छाओं को मारता भी है क्योंकि वह अपने पद का सम्मान करता है और जो अपने पद का सम्मान नहीं करता उसे दूसरों से सम्मान नहीं मिलता है।           ठीक ऐसे ही एक और पद है जो सभी पदों से कहीं ऊपर है और वह है स्त्री पद। जिसकी भी कुछ प्रत्यक्ष गरिमा होती है जिसे वही बनाए रखती है जो अपने स्त्री होने पर गर्व करती है। क्योंकि हर कोई अपने पद की प्रत्यक्ष गरिमा को बनाए रखने के लिए मे...

ईश्वर का पैगाम, भक्तों के नाम

कौन हूँ मैं? कहने को तो आप लोगो का भगवान हूँ पर क्या मैं वास्तव में भगवान हूँ? भगवान कौन होते है? इस पूरी सृष्टि के रचयिता, आप के रचयिता। पर क्या आप इस बात को गम्भीरता से लेते हो? आपकी हर समस्या को लेकर आप (सभी भारतवासी) हमारे पास आते हो समस्या हल मिला तो पूजोगे वरना कभी नही पूछोगे। कुछ मनुष्य कहते है भारत में इतनी पूजा पाठ होती है फिर भी भारत आगे क्यों नही बढ़ता? विदेशी पूजा पाठ नही करते फिर भी सुखी दिखाई देते है। ये सत्य है कि भारतीय पूजा पाठ में अग्रणी है किंतु उतने ही अग्रणी भारत के मनुष्य हमारा अपमान करने में है यह भी एक सत्य है। हम तो आपकी श्रद्धा की आस लगाते है और आप हमें लालची जानकर कभी रूपये तो कभी किसी अन्य वस्तु का लोभ दिखाते है। आज का समय है जब भारत में हमारी पूजा कम अपितु हमारा अपमान अधिक होता है। अरे हम तो कण कण में है ही किन्तु आप यह जानने के बजाय हमे कण कण में दिखाने की कोशिश करते हो और हमारा अपमान करते हो। स्पष्ट रूप से कहते है हमारा तात्पर्य क्या है? कुछ दिनों पूर्व हम धरतीलोक भृमण पर आये थे। वैसे तो हमे परिस्थितियां ज्ञात थी किन्तु अब जब हमने स्वयं आकर महसूस की तो मन ...

महादेव पर दूध

*महादेव पर दूध, जल चढ़ाने के खिलाफ पटर - पटर बोलने वालों जरा सुनो ना...।*  बड़ी बड़ी होटलों में खाने का दुगना पैसा देने के बजाय घर का खाना खाकर उन पैसों से गरीबों को भोजन कराओ ना......।  बेफिजूल गाड़ी दौड़ाने की बजाय कभी पैदल चलकर तो कभी बस में सफर कर पेट्रोल के पैसे बचाओ और गरीब बच्चों को खिलौने दिलाओ ना....। सिनेमा में बार-बार जाने के बजाय कभी तो वृद्ध आश्रम या अनाथ आश्रम हो आओ ना....। अपनी महंगी जरूरतों से पैसे बचाकर एक ही सही पर प्रतिभाशाली गरीब बच्चे को पढ़ाओ ना....।  और अगर यह सब करने की हिम्मत नहीं तो अपनी जुबान पर लगाम लगाओ ना....।  धर्म के खिलाफ तो मुंह उठाकर आ जाते हो कभी झूठे दावे करने वाली कंपनियों के खिलाफ बोल कर दिखाओ ना....।  जिन महादेव को तुम काला पत्थर कहते हो उन्हीं के मंदिर में जब भंडारा होता है ना तो गरीब अमीरों के साथ बैठ कर खाते हैं जो यदि किसी दुकान, हॉटल, मॉल या सिनेमा के बाहर भी दिख जाए तो धुत्कार कर भगा दिए जाते हैं। हम महादेव पर दूध चढाने में मानते हैं तो मंदिर के बाहर बैठे गरीब को कुछ ना कुछ देना भी जानते हैं।  भोजन में भी जीवन ह...

संस्मरण- तुम बहु हो

कुछ दिनों पहले की बात है घर में तैयारी चल रही थी..। किस त्यौहार की? नही नही त्यौहार की नही दरअसल रिश्ते के लिए लड़के वाले आने वाले थे। तो बात अब ये थी की मुझे क्या-क्या पहनना है? कौनसा सूट? कौन सी ज्वेलरी? इसी पर बात चल रही थी। तब काफी देख परख के बाद एक सूट तय हुआ। अब बारी आई गहनों की..... तब भाभी बोले दीदी आपकी बालियाँ(सोने की) बहुत छोटी है लड़के वालों के सामने थोड़ा वट पड़ना चाहिए। आप ऐसा करो आप मेरे टाप्स पहन लो मैं आपके या फिर कोई खोटे पहन लुंगी....... तभी माँ ने बिच में ही टोकते हुए कहा- *नही तुम बहु हो*  बेटी सोना पहने या ना पहने पर तुम घर की लक्ष्मी हो तुम्हे अपने गहने नही उतारने है...। माँ के इन शब्दों को सुनकर हर किसी के चेहरे पर एक भावपूर्ण मुस्कान आ गयी...। ☺️

चीन का बहिष्कार

*चीन का बहिष्कार* मित्रो,   चीन का बहिष्कार आज देश में बड़ा व अहम मुद्दा बन गया है जिसमे कई लोग इसके समर्थक है तो कई विरोधी। जो समर्थक है वे सोचते है कि जो देश हमारा बुरा चाहता है उससे रिश्ता शीघ्र ही पूर्णतः टूटना चाहिए जो की सम्भव नही और जो विरोधी है वह यह सोचते हैं कि चीन के बिना हमारा देश पंगु हो जाएगा जो तो बिल्कुल संभव नहीं।         मेरे अनुसार चीन का बहिष्कार तीन स्तरों पर होना चाहिए।  *1) उन चीजों का बहिष्कार हो जिनका विकल्प हमारे पास उपस्थित हो । हो सकता है विकल्प उतना अच्छा ना हो पर इतना बुरा भी नहीं होगा कि उसका उपयोग न किया जा सके।* *2) उन चीजों का बहिष्कार हो जिनका विकल्प तो नहीं पर वह इतनी आवश्यक भी नहीं कि जिसके बिना आपका जीवन रूक जाए या आपकी प्रगति रुक जाए या आपका कार्य अटक जाए।* *3) यहां वह चीजें आती है जो आज जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है जैसे मोबाइल व कुछ इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं। जिसका समय तब आएगा जब देश से उपयुक्त चीजें पूर्णतः बहिष्कृत हो जाएंगी अर्थात आखरी पायदान पर और संभव है कि तब तक भारत भी इसका विकल्प खोज ले।* अब जो चीन के बहिष्कार का व...

गृहणियों को समर्पित

*क्या आप गृहणी हो???* "हां" *क्या आप घर की सारी जिम्मेदारियाँ निभाती हो???* "हाँ" *क्या आप स्त्रियों की इन जिम्मेदारियों को मजबूरी मानती हो???* "हाँ" *अरे !*  ये क्या बात करती हो? गृहणी के कार्यो को मजबूरी कहती हो!! लेकिन क्यों? क्योकि दुनिया के सामने जब कहो की तुम एक गृहणी हो तो वो तुम्हे साधारण समझते है इसीलिए??? तो तुम्हारे भीतर यह क्षमता नही की तुम उन्हें यह बता सको की सफल गृहणी होना कोई साधारण बात नही। गृहणी होने में बुराई क्या है? यदि आपको यह लगता है कि गृहणी की जिम्मेदारी सिर्फ स्त्री ही क्यों निभाए पुरुष क्यों नही? तो ऐसा है जिम्मेदारी कोई खिलौना नही जो किसी भी बच्चे को थमा दे, वह घर की महत्वपूर्ण डोर है जो उसी को थमाई जा सकती है जो उसके काबिल हो। आप गृहणी होने पर स्वयं को दूसरों से कम क्यों आंकती हो? ऐसा नही है कि गृहणी होने का मतलब है अपनी सारी इच्छाओं को मार देना बस थोड़ा संतुलन बिठाना होता है और यह तो पुरुष भी करते है क्योकि परिवार की जिम्मेदारी तो उन पर भी आती है। देखो ऐसा है स्त्रियां घर का काम करे और पुरुष बाहर का यह इसलिए नही किया गया कि स्त...

लघुकथा- उपहार

8 साल का टिंकू कई दिनों के बाद अपने पापा के साथ बाहर जा रहा है....। "अरे पापा जल्दी चलो ना" "हाँ बेटा बस आ गया, लो फटाफट ये मास्क पहन लो" "पर पापा अब तो कोरोना नही है ना" "हाँ बेटा पर मास्क की आदत डाल ही लो क्योकि कोरोना हो न हो पर प्रदूषण तो बढ़ने ही वाला है।" "पापा मास्क में मेरा दम घुट रहा है, इसे निकाल दूँ..?" "अरे बेटा......" "हाँ ठीक है पता है आप हर बार की तरह यही बोलोगे की मैं तुम्हारी उम्र का था तो मैं भी तो पहनता था।" "नही बेटा, मैने बचपन में मास्क नही पहना हमारे समय तो वातावरण बहुत शुद्ध था, चारो और ताजी हवा होती थी।" "टिंकू उदास होकर बोला- तो पापा हमारे साथ ये चीटिंग किसने और क्यों की?" "पिता निःशब्द......" "बेटा फिर पूछता है, पापा बताओ ना......" "पिता बोलते है हमे माफ़ कर दो बेटा तुम्हारे साथ ये चीटिंग हमने ही की है हमे तो एक बढ़िया दुनिया मिली थी हमने तरक्की के आवेश में इसे खराब करके तुम्हे दे दी....(पिता उदास हो जाते है)" "बेटा बोला-  कोई बात नही पापा ...

पहनावे की आजादी- लेख

*वस्त्रों की मर्यादा व बंदिश में अंतर समझना अति आवश्यक है।* देश की आजादी के बाद स्त्रियों की आजादी की कहानी शुरू होती है....। जो पर्दा प्रथा से शुरू होकर जीन्स टॉप तक पहुँच चुकी है लेकिन कारवाँ अब भी जारी है....। आजकल स्त्रियों के लिए आजादी का मतलब बस अपने पसन्द के कपड़े पहनने जितना ही रह गया है। जिसके लिए अत्याचार, हम अबला नही है, तरक्की में रूकावट जैसे बहाने दिए जाते है जो की सारे निरर्थक है।  अभी कुछ दिन पहले एक मैसेज आया- *की कोई जीन्स पहनकर भी सम्मान देती है तो कोई घूंघट में भी गाली देती है।*    अब यहाँ दो अलग अलग बातों को जोड़ दिया, पहनावा और तमीज..। अरे! कपड़े कोई जादू की छड़ी है क्या जो पहना और सीरत बदल गयी? हाँ काफी हद तक कपड़ो का प्रभाव पड़ता है पर वो भी आपकी सोच अनुसार क्योकि कपड़े पूरा व्यक्तित्व नही अपितु व्यक्तित्व का एक हिस्सा है।  ऐसे तो मैं भी कह दूँ *की हमने मर्यादा में रहकर भी स्त्री को परिवार का नाम रोशन करते देखा है व पूरी आजादी मिलने के बाद भी परिवार को कोर्ट में घसीटते देखा है।*  कहने का मतलब यह की स्त्रियों का पहनावा जो दिन प्रतिदिन छोटा होता जा...

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बेटी का महत्व

आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...

दोस्ती की पहचान

दोस्ती क्या है आज मन मे उठा य़े सवाल है ये सच्ची यारी या है कोई बबाल दोस्ती को समझने के लिए लिया दोस्तो का सहारा तब पता चला ये बबाल नही है रिश्ता बडा ही प्यारा मुझे क्या पता चला वह मैं आपको बताती हूँ मैने कीतना समझा अपनी कविता से आपको सुनाती हूँ की दोस्ती हवाओ का है एक इशारा सुबह की गुनगुनी धूप सा सुनहरा कभी दोस्ती है पूनम के चॉद सी तो कभी नोक झोक मे अमावस की रात सी कभी हो हथेलियो मे शांत कंगन तो कभी खनकती चुडियो की खनखन कभी दुल्हन के होठो पर चमकती हुई लाली तो कभी मनमोहक खुशबू लाल गुलाबो वाली ये है ऐसा रिश्ता जो हर जगह मिल जाए जाए कही भी हम अगर एक नया दोस्त पा जाए कीतने बताऊँ दोस्ती के है कितने सारे रंग सिर्फ इतना पता है यह रिश्ता हमेशा होगा संग सिर्फ इतना पता है यह रिश्ता हमेशा होगा संग

नारी की परिभाषा

नारी की परीभाषा  नारी ही तो है सम्मान आदर की मुरत  नारी ही दिखलाये जीवन मे खुशियो कि सुरत  नारी का करोगे सम्मान आदर मिलेगा  जीवन गुलाब के फूल कि तरह खिलेगा  नारी ही तो भारत मॉ ममता की मुरत है  नारी ही तो देश कि आजादी का स्वरूप है  दुनिया को बनाने वाली नारी माता दुर्गा है  दुनिया को बचाने वाली नारी मॉ कालीका है  दुनिया मे ही एक देश नारी भारत मॉ का है  जिनकि मिट्टी की खुशबु मे हर कोइ बन्ध जाता है देश को बेचने वालो का काल ही तो नारी है  आजादी दिलाने वाली नारी लक्ष्मीबाई है  नारी के है रूप इतने देवि कहलाये वो  हर रिश्ते को सच्चे साफ मन से निभाये वो  मॉ बाबा का बेटी बन सर गर्व से उठाए नारी  तो कभी बहन बन रक्शाबन्धन निभाये नारी  कभी बन पत्नि सात जन्मो का दे साथ नारी  तो कभी मॉ बन ममता बिन स्वार्थ लुटाए नारी  नारी के बिना किसी का कोई अस्तित्व नहीं  बादलो को चिर निकला सुर्य का प्रकाश है नारी बादलो को चिर निकला सुर्य का प्रकाश है नारी