जिंदगी क्या है? जिंदगी क्या है? इस सवाल का जवाब ढूंढना ही जिंदगी है। सुख चाहे आपके पास सभी हो पर ख़ुशी कितनी है? यह समझना ही जिंदगी है। सुकून की चाहत मे सुकून खोते है हम उस भागदौड़ मे दो पल सुकून के मिलना ही जिंदगी है। खुश होने के कारण तलाशना ना पड़े मन का छोटी बातो मे भी खुश होना ही जिंदगी है। ईर्ष्या, द्वेष, मद इनसे सबसे ज्यादा नुकसान हमारा ही होता है यह समझकर दिल से इन बोझ को हटाना ही जिंदगी है। अब आप मुझे ही देख लो रविवार की सुबह भागदौड़ से दूर खुली हवा मे बैठकर मन के भावो को शब्दों मे सहेजने से मिलने वाला सुकून ही तो जिंदगी है। -पूजा ओझा (नूतन)
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...