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संदेश

मातृभूमि

क्यों प्यार है,  वजह कहो, क्यों भारत इतना प्यारा है, भ्रष्टाचार है, धर्म के झगड़े, क्या भविष्य तुम्हारा है? कहो भला ये बात क्या हुई, ये सोच तुम्हारी बच्ची है, वजह प्रेम की समझानी पड़े  तो समझ तुम्हारी कच्ची है, माँ का कोई विकल्प न होता, मातृभूमि पवित्र है, अच्छा, बुरा कुदरत की आदत  बदलते रहेंगे चित्र ये...।

31 दिसंबर 2025

2025 भी शुरू हुआ था  एक दिन आज खत्म होने को आया है, कितनी ही प्यारी यादो से  इसने खुद को संजोया है, तो कितने ही गमो मे इसने  कई पलकों को भीगोया है, हँसते - रोते ये साल भी बीत गया, अब कैलेंडर बदलने को आया है, जनवरी से दिसंबर तक नई यादो का  नया सफर साथ मे लाया है....।

माँ

सब चल रहा है, सब ठीक ही है, पर आप होते तो बात कुछ और होती....  जिंदगी कई मोड़ से गुजरी और गुजरेगी, पर आप साथ होते तो परिस्थितियों से मुलाक़ात कुछ और होती.....

स्त्री

सुनो जरा  यदि स्त्री का जीवन इतना ही आनंदमय है  तो स्त्री ही क्यों कहती है "अगले जन्म मोहे  बिटिया ना कीजो " क्यों कभी पुरुष नहीं कहते  की "अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो।"? यदि स्त्री का गृहणी जीवन इतना आसान  और आरामदायक है तो पुरुष कभी क्यों  नहीं कहते मैं तुम्हारी जिम्मेदारी उठाता हूँ  तुम मेरी उठाओ जबकि स्त्री हमेशा तैयार  होती है पुरुष की भी जिम्मेदारी उठाने को। वैसे तो दोनों का ही अपने स्थान पर महत्व  है पर स्त्री को और उसकी जिम्मेदारियों को  अति कमतर  समझना गृहणी होने के प्रति  स्त्री की इच्छाओ को मारता है।

हम ग्रहिणी है

नहीं तो.... हम नहीं मानते ग्रहिणी के काम को छोटा, हाँ हम जानते है ग्रहिणी के कर्तव्य महत्वपूर्ण है, हम ये भी जानते है की ग्रहिणी की जिम्मेदारियां खास है, लेकिन ये दुनिया हर चीज को पैसो से तोलती है, ग्रहिणी के रूप को नाकारा बोलती है, ऐसे में जब हम ग्रहिणी के रूप में अपने अस्तित्व को  महत्वहीन पाती है, तो बस अपने अस्तित्व की लाज बचाने के लिए  कुछ कर दिखाने को निकल जाती है, और जब लौटती है तो अपने ग्रहिणी के रूप को संवारकर  सबकी नजरो में सम्मान पाती है, और तब हम ख़ुशी ख़ुशी ग्रहिणी होना चाहती है....।

गणेश चतुर्थी 2025

हे गजानन, एकदंत  हर घर में आप पधारो, घर में जो कुछ बिगड़ी दशा मेरे बप्पा आप सुधारो, आपका आगमन हर्ष हमारा  श्रद्धा पुष्प चढ़ाये हम, गणपति बप्पा मोरया  उल्लास से शोर मचाये हम...।

अहमदाबाद विमान हादसा - जून 2025

किसी ने बच्चे खोये,  किसी ने माँ बाप, किसी ने खोया पूरा परिवार, वो उड़ान न जाने कैसी थी, की दहल गया संसार, कोई जाते जाते रह गया, कोई जाकर जिन्दा बच गया, ये जीवन का खेल अजब सा है, हर जान की कहानी रच गया, किसी की जीवन की शुरुआत ही थी, कोई नए सफर पर निकला था, कोई अपनों से मिलने को बेताब, कोई घर जाने को तरसा था, सबकी मंजिल अलग सी थी, पर नियति शायद एक समान, सबकी आत्मा को शांति मिले  प्रार्थना यही है हें भगवान.....।

समय

समय भी कितनी करवटे बदलता है, कभी सपने दिखाकर हमें छलता है, तो कभी उम्मीद से बढ़कर फलता है, समय के फेर से बचना किसी के वश में नहीं है, कभी खत्म नहीं होता  तो कभी पल भर में ढलता है......।

हैदराबाद जंगल अत्याचार

वाह रे वाह इंसान  तेरी मैं कितनी क्या तारीफ करू? क्या खूब तरक्की करता है तू  उसकी क्या ही बात करू? तू आँख पर पट्टी भी ना बांधे  सुंदर वन उड़ा देता, तू कान को भी बंद ना ही करे निर्दोष जानवरो को तड़पाता, जिन आवाजों को सुन सुनकर  दिल चीख चीख कर रो रहा, इसकी मंजूरी जिसने दी  वो राक्षस तो खुश हो रहा, एक बात को तुम समझ लेना  ये प्रकृति बेज़ुबान नहीं, जब चीखेगी तो पल भर में  तेरा वजूद मिटा देगी, वो सहती है क्योंकि वो जाने  तबाही सब पर आएगी, करनी होंगी दुष्टो की  पर जान मासूमों की जायेगी....।

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बेटी का महत्व

आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...

दोस्ती की पहचान

दोस्ती क्या है आज मन मे उठा य़े सवाल है ये सच्ची यारी या है कोई बबाल दोस्ती को समझने के लिए लिया दोस्तो का सहारा तब पता चला ये बबाल नही है रिश्ता बडा ही प्यारा मुझे क्या पता चला वह मैं आपको बताती हूँ मैने कीतना समझा अपनी कविता से आपको सुनाती हूँ की दोस्ती हवाओ का है एक इशारा सुबह की गुनगुनी धूप सा सुनहरा कभी दोस्ती है पूनम के चॉद सी तो कभी नोक झोक मे अमावस की रात सी कभी हो हथेलियो मे शांत कंगन तो कभी खनकती चुडियो की खनखन कभी दुल्हन के होठो पर चमकती हुई लाली तो कभी मनमोहक खुशबू लाल गुलाबो वाली ये है ऐसा रिश्ता जो हर जगह मिल जाए जाए कही भी हम अगर एक नया दोस्त पा जाए कीतने बताऊँ दोस्ती के है कितने सारे रंग सिर्फ इतना पता है यह रिश्ता हमेशा होगा संग सिर्फ इतना पता है यह रिश्ता हमेशा होगा संग

नारी की परिभाषा

नारी की परीभाषा  नारी ही तो है सम्मान आदर की मुरत  नारी ही दिखलाये जीवन मे खुशियो कि सुरत  नारी का करोगे सम्मान आदर मिलेगा  जीवन गुलाब के फूल कि तरह खिलेगा  नारी ही तो भारत मॉ ममता की मुरत है  नारी ही तो देश कि आजादी का स्वरूप है  दुनिया को बनाने वाली नारी माता दुर्गा है  दुनिया को बचाने वाली नारी मॉ कालीका है  दुनिया मे ही एक देश नारी भारत मॉ का है  जिनकि मिट्टी की खुशबु मे हर कोइ बन्ध जाता है देश को बेचने वालो का काल ही तो नारी है  आजादी दिलाने वाली नारी लक्ष्मीबाई है  नारी के है रूप इतने देवि कहलाये वो  हर रिश्ते को सच्चे साफ मन से निभाये वो  मॉ बाबा का बेटी बन सर गर्व से उठाए नारी  तो कभी बहन बन रक्शाबन्धन निभाये नारी  कभी बन पत्नि सात जन्मो का दे साथ नारी  तो कभी मॉ बन ममता बिन स्वार्थ लुटाए नारी  नारी के बिना किसी का कोई अस्तित्व नहीं  बादलो को चिर निकला सुर्य का प्रकाश है नारी बादलो को चिर निकला सुर्य का प्रकाश है नारी