*सुबह* समय तो आगे चलता है, रूप सदा बदलता है, कभी सुख, कभी दुःख, कभी सामान्य सा, जीवन की राह बदलता है, लेकिन हर राह पर एक सुकून हर बार ही दस्तक देता है, मन का माहौल हो केसा भी ये उसमे सुकून भर देता है, खुले मे बैठो और करो मन प्रसन्न करने की तैयारी, आती थी, है और आएगी हर बार एक सी सुबह प्यारी, प्रकृति हर सुबह को जो ठंडी हवा, पक्षीयो की आवाज पेड़ो की सरसराहट से सजाती है, सुबह के दृश्य की यही छवि तो मन को सुकून दे जाती है। *पूजा ओझा (नूतन)*