नीलकंठ हे महादेव, हे दया के सागर शिव प्रभो, हे भोलेनाथ हे रुद्रदेव, हे जबरेश्वर हे शिव शंभो, नादानी मे भूल हो कोई हमको क्षमा कर देना आप, रहे शरण मे सदा आपकी मन करते रहे आपका जाप....।
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...