वो गीत ही क्या कोई है जिसमे कोई साज़ नही
कैसा लगता है वो गीत जिसमे कोई राग नही
चिल्लाते रहो चिल्लाते रहो यही गीतो मे होता है
आज की इस दुनिया मे संगीत का गुड्कता लोटा है
कैसा लगता है वो गीत जिसमे कोई राग नही
चिल्लाते रहो चिल्लाते रहो यही गीतो मे होता है
आज की इस दुनिया मे संगीत का गुड्कता लोटा है
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें