जबसे महंगाई आई चिंता बङी है लाई
जिस पर सबसे ज्यादा चिंता बच्चो ने दिखलाई
बच्चो कि एक टोली मिलकर कर रही विचार
उफ ये महंगाई बढ गई कितनी अबकी बार
महंगाई के कारण पहले ही पङ गई है सोटी
ऊपर से पापा ने जेब खर्च में कि कटोती
कैसे होगी पार्टी अपनी दोस्तो ये बतलाओ
महंगाई से बचने का कुछ उपाय तो लाओ
अचानक एक विचार एक बच्चे के मन में सूझा
एक ही उपाय है और नही कोई दूजा
बङे लोग जो करते है काम वही करेंगे हम
टेक्स लगाकर हर चीज पर जुटा लेंगे रकम
आज से हमारे हर काम पर टेक्स लेंगे हम
चाहे जो भी हो जाए टेक्स न होगा कम
मम्मी दूध पिलाने को जिद नही करेगी
पिलाना है यदि दूध हमे एक रुपया वो भरेगी
पापा यदि कोई भी काम हमे बताए
दो रुपये का टेक्स उन पर हम लगाए
कोई भी बच्चा खेलने को ग्राउंङ मे अपने आए
एक रुपये का टेक्स उससे हम चुकवाए
चाहे जो भी हो जाए कोई टेक्स करेगा ना कम
महंगाई कि मार अकेले क्यो झेलेंगे हम
गलत किया बच्चो ने जो हर चीज पर टेक्स लगाए
पर यह बात बङो से ही तो बच्चे सीख के आए
पहले तो हर कोई किसी के काम युँ ही आ जाता
अब तो हर काम के पिछे टेक्स जरूर लगाता
क्या करे इंसान ये मजबुरी उससे करवाए
महंगाई कि मार अब तो कोई झेल न पाए
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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