कोई समझे कविता बस दर्द मे लिखी जाती है
तो कोई समझे कि यह तो दिमाग मे आती जाती है
कोई कहता कविता नही लिखना है आसान
तो कोई कहे कि कहा मिलता इसका ज्ञान
कवि लोग जब लिखे कविता सोच के सागर मे ङूबे
जाने कहा से उनको एैसी पंक्तिया कैसे सूझे
कोई कहे कि कविता में बस हंसी मजाक ही होता है
तो कोई कहता कि कवि तो पत्नी पर ही लिखता है
कविताएँ तो होती है बङी बात का छोटा रूप
छाया देती कवियो को जब निराशा कि लगती है धूप
कोई समझे कविता लिखने का होता है जुनुन
तो कोई समझे कि यह तो होता पीढीयो का खून
कहता कोई कविता में कुछ मजा नही होता है
पर कविता वो ताकत है जो मन के रूख को पलट दे
कोई समझे कविता पर्यायवाची होती जल कि
जैसा तुम लिखना चाहो बस उसी रूप मे ढल जाती
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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