जानती हूँ मै अच्छी नही पर बुराई से लङना आता है
बुराई मुझमे काफी है पर उन्हे सुधारना आता है
कई बार चलते चलते ठोकर खाकर गिरती हूँ
पर उठ जाने के फिर बाद सम्भलकर चलना आता है
कई बार जब नादानी मैं दिल किसी का दुखाती हूँ
पर एहसास होने पर माफी मांगना आता है
चाहे मैं ना समझु सबको समान
पर अपने से छोटो का भी आदर करना आता है
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें