किसी ने आँखो का मंजर बेचा ,
तो किसी ने ख्वाबो का समंदर बेचा,
हमारे ख्वाब कोई खरीद न सका,
क्योकि चाँद को हमने अपने हाथो मे देखा ।
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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