छठे अध्याय मे भगवान बोले
मित्र, शत्रु स्वयं मानव है
मन, इन्द्रियाँ व जीत ले शरीर
वही स्वयं का मित्र सच्चा है
जो न जीत पाया है स्वयं को
शत्रु स्वयं का वो बन गया है
किसी और का ना योगदान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहान 2
मिट्टी, पत्थर, स्वर्ण समान है
वह योगी युक्त भगवत्प्रास है
योगी न हरदम जागने वाला है
न हरदम वो भूखा रहता है
ना ही ज्यादा ना ही कम
सही मात्रा मे निंद्रा और भोजन
वही सच्चा योगी जान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहान 2
अर्जुन बोले मन बडा चंचल
वश मे करना अति है दुष्कर
भगवान बोले माना मुश्किल है
अभ्यास, वैराग्य से सफल होगा यह
उसका प्राप्त होना है सहज
प्रयत्नशील पुरूष द्वारा यह
यह मेरा मत है मान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहान 2
अर्जुन बोले हे भगवन
जिसका योग मे ना है मन
उसका क्या होगा ये जहाँ मे
किस गति को वह प्राप्त होता है
भगवान बोले ना नर्क ना स्वर्ग
उसका होता है मानव जन्म
कर्म से जन्म हो जान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहान 2
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