मंदिर बने , मस्जिद बने, कई बने गुरूद्वारे
पर आज कहाँ किसी के घर मे प्रभु पधारे
कलयुग की भक्ति का तो रूप अलग ही हो गया
भक्ति मे इंसान नही दिखावे मे ही खो गया
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें