खुशनसीबी तब होगी जब देश के खातिर कुछ कर जाऊँ
अपने देश को नं. 1 के उस शिखर तक मैं पहुँचाऊ
ईश्वर से एक विनती है तु जब चाहे बुला लेना
पर कफन हो तिरंगे का इतना उपकार दिखा देना
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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