मूषक वाहन जिनका भागे
शिश मुकुट और सुंड भी साजे
एकदन्ताय, वक्रतुण्डाय शिव के सलोने गणराया
हुआ निराश ना वो कभी दर पर तेरे जो आया
नटखट गन्नु विघ्नहर्ता हरते सभी कलेश
इसलिए हम कहते है प्रथम पुज्य गणेश
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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