पंद्रहवे अध्याय में भगवान बोले
पीपल संसार रूपी वृक्ष है
वेद पत्ते जिसके कहे है
देव , मनुष्य आदि शाखाएं
ममता , वासनारूप है जड़े
विचारकाल का वृक्ष नही ये
आदि , न अंत है इसका जान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहान 2
शरीर की माया का ज्ञान है मुश्किल
कैसे परिवर्तन होता है
आत्मा शुद्ध हो वह है ज्ञानी
रहस्य वही जान पाता है
अज्ञानी करे यत्न कितना ही
आत्मा को जान नही पाता है
हर तेज में मुझको जान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहान 2
हे निष्पाप सुन ले हे अर्जुन
मुझे जो जाने वो हे ज्ञानी जन
हर प्रकार से हर रूप से
मुझको भजता है उसका मन
इस रहस्य को जो जान जाता
शास्त्र मेरे द्वारा जो कहा
वह हो जाता ज्ञानवान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहान 2
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