जो हरपल सोचा करती है
जो हरपल देखा करती है
एक बात यही उसके मन में
की क्यों वो इतना डरती है
अपनों में ही सारी दुनिया उसने तो बस देखी थी
सबको खुश करने में ही बस वो busy रहती थी
कोई ऐसा आया जिसने उसको यु बर्बाद किया
ख़ुशी से जीवन जीने का हक यु उससे छीन लिया
उसको फर्क क्या पड़ता है सजा है इसकी कड़ी नही
पर वो तो अब चेन से जीवन जी पाएगी नही
लोगों के इन तानो ने उसको यु झकझोर दिया
उसकी गलती ना थी फिर भी सबने यु मुँह फेर दिया
कुछ लड़ी इन्साफ के खातिर
कुछ ने जीना छोड़ दिया
नारी की गाथा पर ना सरकार ने अब तक गौर किया
लोगों की हमदर्दी को वो हरपल देखा करती है
कब होगा सम्मान मेरा हरपल सोचा करती है
वो हरपल सोचा करती है
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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