सोलहवे अध्याय में भगवान बोले
मनुष्य दो सम्पदा का है
पहली होती देवी सम्पदा
दूजी आसुरी सम्पदा है
भय ना कर तू ना घबरा
देवी सम्पदा में तू हुआ
कर्म मनुष्य के जान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहाँ 2
क्षमा, तेज शुद्धि बाहर की
शत्रुभाव न होना जरूरी
देवी सम्पदा के लक्षण है ये
आसूरी के जाने क्या होते
दम्भ , घमंड , क्रोध , अभिमान
अज्ञान और कठोरता भी है
स्वर्ग , नर्क का ज्ञान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहाँ 2
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें