अठारहवें अध्याय में अर्जुन बोले
त्याग , संन्यास की बाते खोले
भगवान् दे रहे है यह ज्ञान
राजसी , सात्विक , तामसी का भी ज्ञान
कर्म , त्याग , कर्ता और ज्ञान
इनके भी तीन प्रकारों को जान
बता रहे भगवान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहाँ 2
मैंने रहस्य ये तुझसे कहा
तूने मन से इसे श्रवण किया
रहस्य कहना जिससे भी तुम
श्रवण करने का हो उसे मन
बिन इच्छा वालो से न कहना
मुझमे ही लीन हमेशा रहना
मोह है छूटा तमाम
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहाँ 2
संजय ने इस ज्ञान को सुना
रूप देखा है हजारो गुना
स्मरण कर हर्षित हो रहे
चित्त में महान आश्चर्य भी है
कृष्ण , अर्जुन जहाँ स्थित है
विजय वही पर प्राप्त होती है
संजय का मत मान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहाँ 2
गीता सार - समापन
"अठारह अध्याय की गीता का ज्ञान
सुना हमने अर्थ महान
मन से समझे जो गीता को
हो जीवन उसका निहाल 3"
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