सतरहवे अध्याय में भगवान् बोले
राजसी , सात्विक , तामसी क्या है
कहे कृष्ण ये श्रद्धा होती
मनुष्य के स्वभाव से निर्मित
तीन प्रकार की होती है ये
राजसी , सात्विक तथा तामसी है
तू मुझसे ये जान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहाँ 2
सात्विक पुरुष देवो को पूजे
यक्ष , राक्षसो को राजसी पूजे
भुत , प्रेतो को पूजे तामस
तीनो का भोजन होता है अलग
सात्विक को प्रिय स्वस्थ भोजन
कड़वे , खट्टे राजस का मन
तामस का बासी जान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहाँ 2
श्रद्धा से पूजे श्रद्धा से दे दान
सत् कहलाता है श्रद्धा मन
बिन श्रद्धा के जो कोई पूजे
असत् होता है दान भी चाहे
न वह इस लोक में लाभदायक है
मरने पर भी कुछ नही है
श्रद्धा का रखना दान
कृष्ण वाणी का लो गीता ज्ञान
सुन लो सारा जहाँ 2
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