आशाओ के दीप कभी बुझते नही
जो ठान लेते हे कभी रुकते नही
एक दिन पूरा होगा अपना भी सपना
हर किसी की जुबान पर बस नाम होगा अपना
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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