हाथ में त्रिशूल है शीश चंद्रमा धारी,
शम्भू कभी रूद्र है कभी भोले भंडारी,
भुत प्रेत भी है शरण में शिव की महिमा न्यारी
भक्ति में सब मिलकर बोलो जय शिव शम्भू जय शिव शंकर जय भोले भंडारी जय भोले भंडारी
आप सभी को महाशिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाये
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें