ऐ देशद्रोह के दाता सुन
आतंक के भाग्यविधाता सुन
जाग चुकी है फिर यह धरती
उन कदमो की आहट सुन
अब तू तो ना बच पायेगा
अब तू तो ना टिक पायेगा
तू भूल गया यह देश है किसका
सुन याद तुझे अब आएगा
यह देश नही भगोड़ों का
यह देश नही है चोरो का
यह देश है शेर सी ताकत रखते
भारत माँ के वीरो का
लक्ष्मी है इस देश की बेटी
शर्म , हया आँखों में रहती
पर दिल में लक्ष्मीबाई की मूरत
तुझको वो खाक कर देगी
ना हम जलिया बाग को भूले
ना ही हम आजाद को भूले
ना भूले वो फुट डालना
अपनों का अपनों को मारना
ना तुझ जैसे गद्दार को भूले
ना अपनों के वार को भूले
पर भूल गया तू तुझ जैसो के
कटे सर मिट्टी में मिले
यूँ तो देश में फूल बिछे है
पर तुझको वो अंगार लगेंगे
नजर उठा कर देख तुझे
यहाँ भारत माँ के लाल दिखेंगे
जो खिलाफ देश के जायेगा
ना हिन्दू ना ही मुस्लिम
इस बात को सह पायेगा
भारत माँ पर तेरा एक शब्द
तुझे नर्क का द्वार दिखाएगा
हर देशद्रोही इस धरती का
अब तो ना बच पायेगा
अब तू काबिल ना होगा की
फिर इतिहास दोहराएगा
या फिर गुलाम बनवायेगा
अब जाग चूका हर भारतवासी
तू कुछ ना कर पायेगा
तू पहले ही जल जायेगा
तू पहले ही जल जायेगा
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