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आतंकवाद की नही जरूरत हम अपने ही काफी है
क्रोध की ज्वाला सबको जला दे यहाँ ना मिलती माफ़ी है
2 सदी पुराना किस्सा फिर सामने खड़ा हुआ
देश की इज्जत दाव लगाकर खेल रहे कुछ लोग जुआं
इस बार की नासमझी में बस थोडा सा अंतर है
बाहर वाले ने नही अपनों ने फूंका मन्त्र है
हिन्दू बोले गलत है मुस्लिम मुस्लिम की भी यही कहानी
हममें झगड़े लगवाकर कुछ लोग कर रहे मनमानी
तुम चाहो तो पल में मिटा दो अपने मन की कड़वाहट
इंसानियत के कदमो की सुनकर तो देखो आहट
गुनाह जो भी करता है सजा का हकदार सिर्फ वही
पुरे धर्म को चोट पहुचाओ ये तो बिलकुल सही नही
जाने कब तक दुसरो के भड़काने पर हम भड़केंगे
जहर दबा कर सीने में जाने कब तक रखेंगे
क्रोध उन्हें दिखाओ तुम जो तुमको भड़काते है
नफरत की ज्वाला में वो तुमको भी तड़पाते है
इतने हम तो गिर चुके की धर्म को भी बदनाम किया
ईश्वर , अल्लाह , ईसा मसीह इन पर भी तीर छोड़ दिया
आया कोई उसने तुमको जहर भरा प्याला दिया
तुमने भी ना सोचा समझा उस जहर को पी लिया
सोचो तुम भी क्या कोई पूरा धर्म पापी होगा
ईश्वर , अल्लाह , god से कोई तो डरता होगा
पापी हे मुट्ठी भर लोग आग को जो भड़काते है
उस आग में जान गवाने कई लोग कूद जाते है
विनती मेरी सबसे है जो दिमाग है उससे काम करो
जो तुमको भड़काता है उसको ही बदनाम करो
है गवाह इतिहास हमारा जब अपनों को मारा है
जमीर अपना खो दिया देश हमारा हारा है
उम्मीद करती हूँ यही निर्दोष की जान बचाएंगे
जब भी खोए संतुलन इंसानियत को लाएंगे
==== नूतन त्रिवेदी ====
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