गुरु ही ब्रम्हा है , गुरु ही विष्णु है , गुरु ही देवो के देव महेश
गुरु की शरण उन्नति लाये मिट जाते है सारे मन के कलेश
नूतन की सोच ये हे पूजा का विचार
गुरु का ज्ञान बढ़ाए शिष्टाचार
गुरु पूर्णिमा पर सभी को मेरा शत शत नमन
क्योकि हर इंसान कुछ न कुछ तो सिखाता है इसीलिए हर इंसान में एक गुरु है ।
=== नूतन (पूजा) त्रिवेदी ===
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें