खूब कमाया तुमने पैसा खूब लिया है ज्ञान
पर तिनका भर भी ना तुम जुटा सके सम्मान
समाज के शुभचिंतक होने का ढोंग बखूबी करते हो
पर जिनके चरणों में स्वर्ग उनकी आँखे भरते हो
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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