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नारी के संस्कार

नारी , जिसे दुनिया अबला समझती है और कहती है नारी को पुरुषो के समान अधिकार, प्यार, सम्मान और संस्कार मिलना चाहिए ।
शुरू की 3 चीज़े तो सही है लेकिन जब बात संस्कार की आती है तो उसमे नारी व पुरुष को समान नही रखा जा सकता ।
मेरे कहने का तात्पर्य यह नही है की नारी को बंदिश में रखा जाए या रूढ़िवादी संस्कार उस पर थोपे जाए मेरे कहने का तात्पर्य है संस्कार।
अच्छे संस्कार की जरूरत तो नारी और पुरुष दोनों को है पर ध्यान देने की जरूरत पुरुष से ज्यादा नारी पर है और ऐसा इसीलिए क्योकि नारी एक शक्ति है वो शक्ति जिसकी क्षमता का अंदाजा अब तक कोई नही लगा पाया ।
नारी का सम्बन्ध दो परिवारो से होता है एक उसका पीहर और एक ससुराल । नारी इन दोनों घरो का मान होती है । नारी यदि अपनी शक्ति को पहचान ले तो वह कुछ भी कर सकने की ताकत रखती है और उस समय वह शक्ति कई पुरुषो की ताकत के समान होती है। नारी की इसी शक्ति के कारण उसके संस्कारो पर ध्यान देने की जरूरत ज्यादा है क्योकि यदि नारी के संस्कार अच्छे हुए तो वह दोनों घरो को स्वर्ग बना देगी। हर परिस्थिति में स्वयं को ढाल लेगी। किन्तु यदि नारी के संस्कारो में खोट रही तो वह दोनों घरो के दुःखो का कारण बन सकती है ।
यही एक सच्चाई है जिसे जानता तो हर कोई है लेकिन मानते सिर्फ कुछ ही है। क्योकि आज नारी पुरुषो के समान बनने की होड़ में वो सब भी करती है जो उसके लिए सही नही है।
और एक बात नारी के लिए मर्यादा में रहना जरूरी इसीलिए है ताकि वह यह साबित कर सके की नारी शक्ति का मुकाबला पुरुष नही कर सकते। मर्यादा नारी की कमजोरी नही ताकत है क्योकि जब जब नारी ने अपनी मर्यादा लांघी है उसका जीना दुश्वार हुआ है और यह बात आज हर नारी को समझना जरूरी है तभी उसका, उसके दोनों परिवारो का, समाज का उद्धार व देश में नारी पर बढ़ते जुर्मो का निदान सम्भव है।
इस मेसेज का अर्थ यह बिलकुल नही है की पुरुष जो चाहे वो करे। मर्यादा में रहना पुरुष की भी जरूरत है क्योकि मर्यादित पुरुष को श्रीराम सा सम्मान मिलता है और मर्यादा लांघने वाले को रावण सा अंत ।

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