आज एक बड़ा ही निराशाजनक दृश्य देखने को मिला।
आज जब में बस से अपने घर लौट रही थी तब बस में मेरे सामने की सीट पर एक व्यक्ति अपने बच्चे के साथ बैठा था और पास ही एक और व्यक्ति बैठा था । जब वो व्यक्ति उठकर जाने लगा तो उसकी जेब से एक 10 रू का नोट सीट पर ही गिर गया। जब उस बच्चे ने वह नोट देखा तो झट से अपनी मुट्ठी में दबा लिया । पिता ने बच्चे से नोट लेकर उन व्यक्ति को आवाज लगाई और नोट लौटा दिया।
फिर पिता ने बच्चे से कहा " बेटा इस तरह किसी के पैसे नही लेते चोरी कहलाती है और फिर पुलिस भी पकड़ कर ले जाती है।"
"हाँ पर पापा मेने देखा है पुलिस को थोड़े से पैसे दो तो वो छोड़ देती है।" उस बच्चे ने कहा
पिता बोले "पर बेटा हर पुलिस वाला बेईमान नही होता तुम्हारे रिश्वत देने की कोशिश कोर्ट तक भी ले जा सकती है।"
बच्चा नादानी में बोला "हाँ पर कोर्ट में भी ज्यादा सजा कहा मिलती है मेने एक फिल्म में देखा है पैसे से सब काम हो जाता है।"
पिता ने क्रोध में आकर बच्चे को डांट दिया और कहा "जो कहा वो समझ नही आता बहुत ज्यादा फिल्म देखने लगे हो घर चलो तुम्हारा टीवी बन्द करवाता हूँ।"
बच्चा डर गया और पिता से बोला "सॉरी पापा अब नही करूँगा।" और चुप होकर बैठ गया
दोस्तों , इस दृश्य को देखकर मुझे बहुत निराशा हुई की आज बच्चे कैसी शिक्षा ले रहे है। उन्हें अपने पिता की कही बात से ज्यादा फिल्मो पर विश्वास है और सबसे बड़ी बात तो यह है कि उनके मन में क़ानून के प्रति ना तो डर है और ना ही इज्जत । तो ऐसे में क्या होगा उनका भविष्य और हमारे देश का भविष्य। 😢
इसीलिए कोशिश करो की आपके बच्चे इस दुनिया की चकाचोंध से थोड़ा दूर ही रहे अन्यथा उनकी आँखे सच और झूठ देखने की शक्ति खो देगी।
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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