बाल दिवस पर यादो में वो बचपन के दिन छा गए
मन में थोड़ा लगता भी है जाने वो दिन क्यों गये?
खेर छोडो आओ चलो हम उन दिनों में चलते हैं
जब हम अपना बाल दिवस धूम धाम से मनाते थे
काफी दिनों के इंतजार के बाद वो दिन आ गया
मस्ती मजाक में छूट दिलाने बाल दिवस लो आ गया
नए नए रंग बिरंगे कपड़े आज तो पहनेंगे
सर या दीदी कुछ नही आज साथ में खेलेंगे
गीत सुनाए कविता गाए बाल दिवस पर धूम मचाए
आज तो हम सब सेठ है साथ में मिलकर नाश्ता खाए
बैठे है हम राह ताक रहे कब सर नाश्ता लाएंगे
नाश्ता खाकर छुट्टी होगी घर फिर धूम मचाएंगे
आज का दिन है कितना सुहाना काश यही पर थम जाए
रोज हम सब स्कूल जाकर मस्ती करके घर आये
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