दिल का डर अब तोड़ दे
वो सारी बंदिश छोड़ दे
जो आंच आये तेरी अस्मत पर
दुश्मन को मरोड़ दे
याद रख तू दुर्गा हे तू काली हे
तू लक्ष्मीबाई जैसी हिम्मतवाली हे
तेरा मान जो काटे उन पर वार कर
अब ना सहेगी इतना तू विश्वास कर
और अपना दिल फौलाद कर
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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