आज अचानक आई है मन में मेरे एक बात
बहुत बुरा हुआ जो हुआ उन बच्चियों के साथ
लेकिन बात ये है कि जब में रोज खोलती हूँ अख़बार
एक खबर तो होती है कि यहां हुआ है बलात्कार
फिर आक्रोश क्यों आया है इन दो ही घटना में?
फिर समझ आया की इनमे कोई नही अपना है
बात तो ये थी की सबको चाहिए था एक मौका
कैसे किसी धर्म, पार्टी पर जाये लगाया चौका
वाकई जो कुछ दर्द है तो हर पापी की बात करो
उनके दर्द में आकर अपना उल्लू सीधा ना करो
बाकि बच्चियां सोचती होंगी उतर गई जो मौत के घाट
आक्रोश इतना तब भी होता होती अगर धर्म की बात
बात इतनी सी है कि इस आक्रोश से फर्क ना पड़ता है
क्योकि सजा होने तक बस उसका ही परिवार लड़ता है।
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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