क्या हो तुम..... कैसे हो तुम?
तेरे फैसलो को यूँ कुचल रहे है
देख देख ये वहशी दरिंदे
तेरे वजूद से खेल रहे है
एक बनाया नियम तूने
बलात्कारी को फांसी सजा
फिर भी कहाँ ये दरिंदगी का
सिलसिला है रुक रहा
दरिंदो को तो डर नही
पर हैवानियत वो झेल रहे है
देख देख ये वहशी दरिंदे
तेरे वजूद से खेल रहे है
हर रोज एक घटना नई
तुझपर ऊँगली उठाती है
दरिंदो की ऐसी ललकार
तेरे क्रोध को ना भड़काती है?
उनके गंदे विचारों को
तेरे देश के माँ बाप झेल रहे है
देख देख ये वहशी दरिंदे
तेरे वजूद से खेल रहे है
सोच रहे हो हर एक शब्द
किसे दोषी ठहरा रहा
सोच कर देखो तीर कही ये
तुम पर तो ना आ रहा
हर एक जन वो दोषी है
जो अश्लीलता भड़काता है
हर एक जन वो दोषी है
जो उसमे डूबा जाता है
दोषी को तो आज या कल
फांसी हो ही जायेगी
पर कैसे ये अश्लीलता की
गन्दगी दूर जायेगी????
आजादी की बात करो तुम
लो आजादी मिल ही गयी
अश्लीलता की कली कली
इन घटनाओं से खिल गयी
रोक लगा लो अब भी समय है
गलत सोच के जरियो पर
क्योकि मन तो वही करेगा
जैसा देखेगी नजर
युवाओं को बददिमाग कर
उनके जरिये फैल रहे है
देख देख ये वहशी दरिंदे
तेरे वजूद से खेल रहे है
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