अजी तुम भी हमे कितना चिढ़ाते हो
उपवास के दिन चटकारे लेकर खाते हो
ऐसे तो जब भी धास लगती है
चिढ़कर तुम्हारी नाक चटकती है
एक छिक भी तुम्हे ना सुआति है
खास खास कर आँख भर आती है
पर मेरे उपवास के दिन
धास को भी सुगंध बताते हो
अजी तुम भी हमे कितना चिढ़ाते हो
उपवास के दिन चटकारे लेकर खाते हो
देखो प्यार में तो मेरे ना कोई झोल है
पर मेरी भावना का तुम्हारी नजरो में कोई मोल है?
भूख से मेरी जान निकल जाती है
करेले की खुशबु भी नाक को भा जाती है
और तुम हो की खाते समय मुझे पास में बैठाते हो
अजी तुम भी हमे कितना चिढ़ाते हो
उपवास के दिन चटकारे लेकर खाते हो
यु तो तारीफों को मेरे कान तरसते है
पर उपवास के दिन ये बादल जरूर बरसते है
खाने में अचानक चटक आ जाती है
नापसन्द सब्जी भी तुमको भा जाती है
अचार, मुरब्बे की सुगंध बढ़ाते हो
अजी तुम भी हमे कितना चिढ़ाते हो
उपवास के दिन चटकारे लेकर खाते हो
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