क्यों शहीद तुम होते हो
जब देश को कुछ परवाह नही
जान क्यों देते उनके खातिर
जिनके मन में कोई आह नही
तुम भी तो खुश रह सकते हो
तुम्हारा भी परिवार तो है
उन्हें त्यागते उनके लिए
जो देशहित के गद्दार जो है
कुछ लोगो को फर्क नही जो
आज शहीद तुम हो गए
कुछ नही कई लोग है ऐसे
जो दोगलेपन में रो गए
माफ़ करना जो बुरा लगे तो
मैं भी कहना ना चाहती हूँ
पर क्या करूँ खुद को रोक ना पाई
जब ऊपर ही देशभक्ति पाती हूँ
आक्रोश में जितने जुड़ रहे है
देशहित में जो जुड़ जाए
किसकी इतनी हिम्मत है जो
भारत पर नजरे गड़ाए
पाप किया है सजा मिलेगी
आतंकवादी तो मरेगा ही
पर आक्रोश में जुडी ये जनता
क्या खुद के आतंक को मारेगी?
हे किसी में हिम्मत जो ये
शपथ आज ले सकता है
देश के खातिर सीमा नही तो
चंद बाते चुन सकता है
रिश्वत, लालच, बेईमानी से
पीठ में छुरा घोपे हम
क्या आक्रोशियो में है यह हिम्मत
जो मिटा सकें यह आतंक
हम तो भई मजबूर है
ये हमसे ना हो पायेगा
तो जोश की बाते बन्द करो
ये तुमसे ना हो पायेगा
सैनिक बदला ले ही लेंगे
अपना फर्ज निभाएंगे
पर इन दोगले देशभक्तो से
वो देश कैसे बचाएंगे
कुछ ही दिनों में 90%
आक्रोशी रंग दिखाएंगे
बनकर देश के भीतरी कीड़े
देश फिर चटकारे से खाएंगे
इसीलिए तो कहती हूँ
क्यों शहीद तुम होते हो
भारत माँ को भीतर से नोचे
तुम जान सीमा पर गंवाते हो
झूठा आक्रोश वो ना करे
जो गद्दारी को बढ़ावा दे
बुरा लगे तो सौ बार
पर सच यही जो कड़वा है
क्रोध यदि है वास्तव में
तो जंग आज ही छेड़ दो
बाहर तो सैनिक निपट रहे
तुम भीतर का आतंक खदेड़ दो
शपथ की हिम्मत जुट गयी हो तो
बस इतना सा कर देना
ना तारीफ ना वाहवाही
बस वन्दे मातरम लिख देना
यदि सुधर ना सकते हो तो
कोई ढोंग दिखाना नही
शहीदों से हमदर्दी है
ए आतंक प्रियो ये जताना नही
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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