जलियांवाला बाग की घटना आत्मा को झकझोर दे,
फिरंगियों की ओछी हरकत इंसानियत को छोड़ दे,
एक सभा थी आजादी की लाखों लोग जमा हुए,
कुछ पल में ही अंग्रेजो की बेदर्दी में समा गए,
गोली, बारूद ऐसे बरसे जैसे आई सुनामी,
लाशों का एक ढेर लगा लोग हुए सब छन्नी,
13 अप्रेल 1919 के दिन की यह बात है,
आज उस घटना को 100 वर्ष बीत गए,
अंग्रेजो की बर्बरता का शिकार हुए वो मासूम,
आज भी वहाँ उपस्थित है उन भारतीयों का खून,
आजाद भारत के हम वासी अब भी अश्रुपूर्ण है,
शहीद हुए उन शहीदों को हृदय से श्रद्धांजलि दे।
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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