जनसँख्या की बात करो तो
सीमा हद से पार है
अधिकारों की बात करो तो
हर कोई तैयार है
फिर जाने क्यों यही जूनून
और जोश कही खो जाता है
मतदान करने के समय
क्यों मतदाता सो जाता है?
वोट ना देने वालों पर
जब शोध किया तो यह जाना
क्यों जनता ने देश के प्रति
कर्तव्य को ना पहचाना?
आलस करते, मौज उड़ाते
छुट्टी का कुछ लाभ उठाते
कुछ क्रोधित तो कुछ उदास
की हम तो ना कोई लाभ है पाते
अधिकता की जब बात करे तो
सबके मन में शोर है
वोट किसे दे समझ ना आये
सबके सब तो चोर है
कुछ का है यह मानना की
हिस्सेदार हम ना बने
देश, प्रदेश के लिए कैसे
चोर, उचक्के हम चुने?
प्रत्याशी जो खड़े हुए वो
कोई है रावण कोई है कंस
देश, प्रदेश से प्रेम नही है
उन्हें चलाना अपना वंश
सोच भी उनकी गलत नही है
पार्टी के यह जिम्मे है
क्यों रखते ऐसे प्रत्याशी
जो बेईमान और निकम्मे है
आंकड़े यदि बढ़ाने है तो
प्रत्याशी तो बदलना होगा
६०% तुम्हारी सुनते
४० की तुम्हे भी सुनना होगा
आंकड़ा यदि बढ़ भी गया तो
वोट जायेगा खोटा
क्योकि एक विकल्प और है
जिसको कहते नोटा
ये विरोध नही सच्चाई है
कुछ निराश मतदाताओं की बात
बस मैने आप तक पहुँचाई है।
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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