रानी हो, महारानी हो
अखण्ड वीरता की, गौरव की
अद्भुत एक निशानी हो,
सर्वश्रेष्ठ नेतृत्व तुम्हारा
शास्त्र ज्ञान की धनी थी तुम,
आँखों में वो साहस था
चतुर बुद्धि बलशाली तुम,
हर हर महादेव का नारा
अद्भुत जोश जगाता था,
कंठ तुम्हारा बलशाली
जो आसमान गुँजाता था,
जोश वो अब भी घटा नही
जब नाम तुम्हारा आता है,
लक्ष्मीबाई नाम से तनकर
गर्व से सर उठ जाता है,
आज के दिन को आँखे नम है
हमने तुमको खोया था,
मगर वो तुमको ढूँढ ढूँढकर
थककर अंग्रेज रोया था,
वीरगति को प्राप्त हो गयी
स्वाभिमान पर गिरा नही,
अभिमान हुआ खण्ड खण्ड
अंग्रेजो को शव मिला नही,
तुम तो थी पटरानी रानी
सुख का जीवन जी लेती,
मगर देशभक्ति जो तुम्हारी
कैसे गुलामी सह लेती,
२३ वर्ष की आयु में ही
वीरगति को प्राप्त किया,
कम ही सही पर स्वाभिमान
और साहसी जीवन तुमने जीया,
स्वाभिमान का जीवन क्या है?
ये तुमने बतलाया था,
आजादी को समझा तुमने
देश में अलख जगाया था,
आज समय फिर आया है
जब जरूरत हमे तुम्हारी है,
लक्ष्मीबाई के देश में देखो
कैसे अबला नारी है,
तुम पर कैसे नजर उठा दे
सूरज की वो तपिश थी तुम,
आज की नारी ठंडी पड़ गयी
वो चिंगारी हो गयी गुम,
आज के दिन को नमन तुम्हे
पर फिर से जोश जगाना होगा
मातृभूमि की आन के खातिर
तुमको फिर से आना होगा
फिर शोला भड़काना होगा
रानी तुमको आना होगा
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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