शिक्षक, आंतरिक सुंदरता
व जीवन की भव्यता का
निर्माता है,
वह हर क्षेत्र के ज्ञान का
ज्ञाता है,
वैज्ञानिक हो, चिकित्सक हो
या हो कोई इंजीनियर सभी
वही तो बनाता है,
फिर भी कभी घमंड नही
दिखाता है,
साधारण से दिखने वाले,
सादगी से जीने वाले,
बड़ी बड़ी समस्याओ को
चंद पलों में सुलझा जाते है,
ऐसी जीवंत कला के कलाकार
शिक्षक ही तो कहलाते है,
जो ना कभी थकते है,
शिक्षा के मंदिर में ज्ञान
भरपूर परोसते है,
निःस्वार्थ भाव से अपने ज्ञान का धन
कई मजबूत नींव बनाने में
लुटाते है,
ऐसे दानवीर
शिक्षक ही तो कहलाते है,
पर एक सच्चाई और भी है,
ऐसे सच्चे शिक्षक आजकल
कहाँ दिखे?
खेर पर इससे शिक्षक की परिभाषा
बदल ना जाती है,
शिक्षक की परिभाषा तो
सुनहरे शब्दो में लिखी जाती है,
अब जो शिक्षक के इन गुणों पर
खरे उतरते है,
वो शिक्षक कहलाते है,
बाकि तो नोकरी करते है
और तनख्वाह लेकर
घर लौट आते है।
*सभी को शिक्षक दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएँ।*
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