विनती करे जमाने से
अब रहा ना जाये कहने दो,
छल, कपट से परे है जो
बच्चों को बच्चा रहने दो।
मत सिखलाओ उनको तुम
झगड़े को बदलना नफरत में,
पल में कट्टी, पल में बट्टी
यही तो उनकी फितरत है,
जीवन भर कुड़ना ही है फिर
अभी सुकून से जीने दो,
छल, कपट से परे है जो
बच्चों को बच्चा रहने दो।
तुम्हारी रंजिश तुम ही जानो
बच्चों का इसमें दोष है क्या?
तुम पर करे भरोसा यही
उनका कोई दोष है क्या?
तुम जो कहते मान वो जाते
मासूमियत में बहने दो,
छल, कपट से परे है जो
बच्चों को बच्चा रहने दो।
गलत, सही में फर्क बताओ,
अश्लीलता से उन्हें बचाओ,
उम्र से बड़ी वो बाते करते
ऐसा ज्ञान ना उन्हें सिखाओ,
मोबाइल उनकी नही जरूरत
फिर देते जाने क्यों भला?
मोबाइल बचपन का है दुश्मन
माता-पिता ने जानकर छला,
बचपन उनसे छीनो ना
उन्हें शरारत करने दो
छल, कपट से परे है जो
बच्चों को बच्चा रहने दो।
दुनिया की बुराई से
अवगत उन्हें कराओ,
लेकिन इस कोशिश में
बुराई उन्हें ना सिखलाओ,
याद रखो जो अभी सीखेंगे
वैसा जीवन बनाएंगे,
अच्छा ज्ञान ना दोगे तो
जीवन समझ ना पाएंगे,
मासूम उनके दिल और दिमाग पर
बुराई को ना छलने दो,
छल, कपट से परे है जो
बच्चों को बच्चा रहने दो।
अपने स्वार्थ के खातिर झूठ
उनसे क्यों बुलवाते हो?
जीवन की बुनियाद है बचपन
झूठ उन्हें सिखलाते हो,
बचपन के यह चंद ही साल
उनका भविष्य बनाएंगे,
जो सिखलाओ उनको आप
वो आप पर ही आजमाएंगे
देख बिगड़ते भविष्य को
अब रहा ना जाए कहने दो,
छल, कपट से परे है जो
बच्चों को बच्चा रहने दो।
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