*जब से देखा है.....*
जब से देखा है ईर्ष्यालु लोगो को
हमने ईर्ष्या करना छोड़ दिया है,
क्योकि ये ना खुद खुश रह पाते है
और ना किसी को रख पाते है।
जब से देखा है घमंडी लोगो को
हमने घमंड करना छोड़ दिया है,
क्योकि इनके पास इनके खुद के सिवा
और कोई नही होता है।
जब से देखा है लालची लोगो को
हमने लालच करना छोड़ दिया है,
क्योकि ये चंद खुशियाँ खरीदते है
लाखो की खुशियाँ दाव लगाकर।
जब से देखा है इश्कबाज़ों को
हमने इश्क करना छोड़ दिया है
क्योकि अक्सर इश्कबाज इश्कबाज़ी
करते वक्त अपनों और सपनों को
भूल जाया करते है।
जब से देखा है नास्तिक लोगो को
हमने खुद को ईश्वर से और जोड़ लिया है,
क्योकि ये जीवन को सुलझा ही नही पाते है।
जब से देखा है स्वार्थी लोगो को
हमने स्वार्थी बनना छोड़ दिया है,
क्योकि ये खुद को ही खुश रखने के चक्कर में
अक्सर खुद ही दुःखी रह जाते है।
हमे तो जीना है सुकून का जीवन
इसीलिए अच्छी अच्छी बातें
अपनाते जा रहे है,
सभी के जीवन से आएदिन
कुछ न कुछ सीखते जा रहे है।
*नूतन पू.त्रि.*
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