काश अगर ऐसा होता
ये धरती प्रेम में बह जाती,
ना होती जरूरत बम की
ना मिसाइल बनाई जाती,
ना इस तरह धरती माँ के
परखच्चे यु उड़ाए जाते,
हम बच्चे है धरती माँ के
माँ का प्रेम समझ पाते,
लेकिन काश तो काश ही होता
सच भला कब होता है,
अधर्म का मिटना भी जरूरी
साधन बढ़ता जाता है,
भारत भूमि की आन के खातिर
रक्षा और स्वाभिमान के खातिर
मिसाइल का किया निर्माण,
भारत के पूर्व राष्ट्रपति,
श्रेष्ठ वैज्ञानिक,
मिसाइल मेन एपीजे अब्दुल कलाम जी को
उनकी जयंती पर हृदय से सलाम।
*नूतन पू.त्रि.*
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