गर्व कहो या घमंड कहो
हम सबको यही सुनाएंगे,
जब देश का गौरव विवेकानन्द जी
तो गीत गर्व के गाएंगे,
ऐसा मिला नेतृत्व हमे
की राह सही तैयार मिली,
उनके उद्बोधन से देश ही नही
विदेश की भी धरती खिली,
याद रखे जमाना अब तक
उम्र रही फिर कम भी तो क्या,
प्रेरणा अब तक युवाओं की
फिर उम्र भी ये कोई कम है क्या,
जो सम्मान, जो गौरव हमको
दुनिया भर से प्राप्त हुआ,
विवेकानन्दजी का ज्ञान जो
पूरी दुनिया भर में व्याप्त हुआ,
सरल, स्वच्छ, स्पष्ट हो जीवन
ऐसा जन में भाव भरा,
जन्म से उनके पावन हुई है
भारत देश की यह धरा,
मशाल लेकर दौड़े जग में
हर और किया फिर उजियारा,
हिन्दू धर्म को जाना जग ने
लगने लगा वह सबको प्यारा,
ऐसे तेजस्वी महापुरुष को
वंदन हम हर बार करे,
स्वामी विवेकानन्दजी हमारे
इस वंदन को स्वीकार करे,
और हम सबके मन वो अपने
सद्गुण और सद्भाव भरे।
आज अचानक मन बह गया उस और भ्रुण हत्या के मामले दर्ज है चहू और सोचा इस पाप के खिलाफ मैं भी करू कुछ कोशिश ज्यादा कुछ नही तो अपनी कविता मैं ही कुछ लिख भ्रुण हत्या के खिलाफ मैने भी ए...
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