आज की ही बात है आज मंदिर के ओटले पर एक बच्ची बैठी थी जो 3री या 4थी में पढ़ती होगी। अपनी स्कूल गाड़ी की राह देख रही थी।
गाड़ी आने में समय था तो अपने बैग से कॉपी निकाली और परीक्षा का पढ़ने लगी।
वो इतनी जोर जोर से पढ़ रही थी की मुझे अंदर तक सुनाई दे रहा था।
मैं उसे देख ही रही थी की मुझे अपनी परीक्षा के दिन याद आ गए...........।
वो एक लाइन पढ़ती और फिर आती जाती गाड़ियों को देखने लग जाती फिर सर को झकोरती और पढ़ने में ध्यान लगाने की कोशिश करती।
थोड़ा पढ़ती और फिर आती जाती गाड़ियों को देखने लग जाती।
कुछ देर यह क्रम चलता रहा और फिर उसने कॉपी बन्द की और बेग में रख ली इस तरह आती जाती गाड़ियों को देखने का मनोरंजन जीत गया।
क्यों हम भी तो ऐसे ही करते थे न............।
☺☺☺☺☺☺
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