*होलिका दहन*
छोटा सा नजराना,
मोबाइल के युग में मुश्किल है
अब उन दिनों का आना,
होलिका दहन की तैयारी में
हफ्ते भर से जुट जाते,
सारी सखियाँ मिल जाती
साथ में गोबर वल्ले बनाते,
गोल गोल वल्लो की माला
उसमे सुंदर आकृति,
पान का पत्ता, बड़ी जिबान,
सूपड़ा, सुपारी और छन्नी,
इन सबको सारा दिन
गोबर गूंध गूंध कर बनाते,
सबसे बड़ी हो अपनी माला
यह उत्साह बढ़ाते,
कोडियो के बीच रखकर कंकर
नारियल बड़ा बनेगा,
भैया के हाथो से नारियल
होलिका में चढ़ेगा,
बड़ी बड़ी मालाएं लेकर
होलिका दहन को जाते,
पुजा करते माला चढ़ाते
फिर फेरे फिराते,
वहाँ पहुँचकर नाप ली जाती
किसकी माला सबसे बड़ी,
वो लड़की को देखो कैसे
ख़ुशी में फूलकर वो खड़ी,
जीत हार तो बहाना है
स्वास्थ्य सभी का बढ़ाना है,
कंडो के धुँए से सारी
बीमारियों को भगाना है,
पर अब कहाँ वो लड़कियाँ है
कहाँ है वो उत्साह,
चंद पलों का होलिका दहन
फिर अपनी अपनी राह।
*नूतन पू.त्रि.*
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