8 साल का टिंकू कई दिनों के बाद अपने पापा के साथ बाहर जा रहा है....।
"अरे पापा जल्दी चलो ना"
"हाँ बेटा बस आ गया, लो फटाफट ये मास्क पहन लो"
"पर पापा अब तो कोरोना नही है ना"
"हाँ बेटा पर मास्क की आदत डाल ही लो क्योकि कोरोना हो न हो पर प्रदूषण तो बढ़ने ही वाला है।"
"पापा मास्क में मेरा दम घुट रहा है, इसे निकाल दूँ..?"
"अरे बेटा......"
"हाँ ठीक है पता है आप हर बार की तरह यही बोलोगे की मैं तुम्हारी उम्र का था तो मैं भी तो पहनता था।"
"नही बेटा, मैने बचपन में मास्क नही पहना हमारे समय तो वातावरण बहुत शुद्ध था, चारो और ताजी हवा होती थी।"
"टिंकू उदास होकर बोला- तो पापा हमारे साथ ये चीटिंग किसने और क्यों की?"
"पिता निःशब्द......"
"बेटा फिर पूछता है, पापा बताओ ना......"
"पिता बोलते है हमे माफ़ कर दो बेटा तुम्हारे साथ ये चीटिंग हमने ही की है हमे तो एक बढ़िया दुनिया मिली थी हमने तरक्की के आवेश में इसे खराब करके तुम्हे दे दी....(पिता उदास हो जाते है)"
"बेटा बोला- कोई बात नही पापा अब इस दुनिया को, वातावरण को, प्रकृति को हम सुधारेंगे और हमारी आने वाली पीढ़ी को एक बढ़िया, अनोखा और महत्वपूर्ण उपहार देंगे"
" और ऐसे ही बात करते करते घर आ जाता है....।"
*नूतन पू.त्रि.*
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