एक दृश्य सामने आँखों के
जहाँ शहादत पर है आँखे नम,
अभी तीन महीने पहले ही
भरी थी मांग और पहना कंगन,
ना कुछ उसको कहना है
शब्द नही है मन है मौन,
3 महीने में पति खो दिया
उसका दर्द समझे कौन?
पाकिस्तान तो नही बचेगा
कीमत भी चुकायेगा,
पर कब तक जीवन उजड़ेंगे
यह सिलसिला कब रूक पाएगा.....।
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