कैसी ये दिवानगी?
ईश्क, मोहब्बत की परिभाषा
आज जो है वो सही नही,
आकर्षण को प्रेम कहे
यह बात हमे कुछ जमी नही,
कैसी ये दिवानगी है?
कैसा ये दिवानापन?
एक से जब कोई बात न बने
दूजे पर ठहरता है मन,
प्रेम अगर तुम जानना चाहो
रामायण खोलो और पढ़ो,
पतिव्रता वो नारी थी
श्रीराम जी जैसा चरित्र हो,
इक्की, दुक्की प्यार की बाते
कहना ही बस प्रेम नही,
वास्तविक प्रेम की खोज
एक बार तुम करो सही,
ज्ञात तुम्हे हो जायेगा
की आज तो सब छलावा है,
असल प्रेम तो हमारे साथ
माता-पिता ने निभाया है.....।
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