*क्या आप गृहणी हो???*
"हां"
*क्या आप घर की सारी जिम्मेदारियाँ निभाती हो???*
"हाँ"
*क्या आप स्त्रियों की इन जिम्मेदारियों को मजबूरी मानती हो???*
"हाँ"
*अरे !* ये क्या बात करती हो?
गृहणी के कार्यो को मजबूरी कहती हो!!
लेकिन क्यों?
क्योकि दुनिया के सामने जब कहो की तुम एक गृहणी हो तो वो तुम्हे साधारण समझते है इसीलिए??? तो तुम्हारे भीतर यह क्षमता नही की तुम उन्हें यह बता सको की सफल गृहणी होना कोई साधारण बात नही।
गृहणी होने में बुराई क्या है?
यदि आपको यह लगता है कि गृहणी की जिम्मेदारी सिर्फ स्त्री ही क्यों निभाए पुरुष क्यों नही? तो ऐसा है जिम्मेदारी कोई खिलौना नही जो किसी भी बच्चे को थमा दे, वह घर की महत्वपूर्ण डोर है जो उसी को थमाई जा सकती है जो उसके काबिल हो। आप गृहणी होने पर स्वयं को दूसरों से कम क्यों आंकती हो?
ऐसा नही है कि गृहणी होने का मतलब है अपनी सारी इच्छाओं को मार देना बस थोड़ा संतुलन बिठाना होता है और यह तो पुरुष भी करते है क्योकि परिवार की जिम्मेदारी तो उन पर भी आती है।
देखो ऐसा है स्त्रियां घर का काम करे और पुरुष बाहर का यह इसलिए नही किया गया कि स्त्रियों पर अत्याचार करना है दरअसल पहले शादीशुदा जीवन को व्यवस्थित रूप से चलाना मुख्य उद्देश्य होता था लेकिन आज मुख्य उद्देश्य पैसा होता है शायद इसीलिए सभी के मन में यह कटुता है कि हम ही क्यों?
देखो यदि पैसे की ही बात है तो उसमे भी तो स्त्रियां अव्वल है वो तो दोनों जिम्मेदारियां बखूबी निभाने में अग्रणी है। लेकिन जब आप जॉब की तुलना गृहणी की जिम्मेदारियों से करते हो वह अनुचित है।
जॉब और गृहणी कार्य में सिर्फ पैसो का ही तो अंतर है।
आप इसलिए अपनी जिम्मेदारियों से कतराते हो की वह आपकी पसन्द की नही तो क्या यह निश्चित है कि जॉब में आपको अपने पसन्द का ही कार्य मिले?
आप सांस की डांट को बड़ी जल्दी स्वाभिमान पर ले लेती हो तो बॉस की फटकार में स्वाभिमान नही गिरेगा?क्योकि वहाँ पैसा मिलेगा?
कहने का तात्पर्य यह है कि गृहणी का कार्य आप तुच्छ समझते हो जो की अनुचित है जबकि गृहणी का कार्य श्रेष्ठ है।
आपको अपने गृहणी होने पर गर्व करना चाहिए क्योकि यह ऐसी जॉब है जो हर किसी के बस की बात नही।
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