*चीन का बहिष्कार*
चीन का बहिष्कार आज देश में बड़ा व अहम मुद्दा बन गया है जिसमे कई लोग इसके समर्थक है तो कई विरोधी।
जो समर्थक है वे सोचते है कि जो देश हमारा बुरा चाहता है उससे रिश्ता शीघ्र ही पूर्णतः टूटना चाहिए जो की सम्भव नही और जो विरोधी है वह यह सोचते हैं कि चीन के बिना हमारा देश पंगु हो जाएगा जो तो बिल्कुल संभव नहीं।
मेरे अनुसार चीन का बहिष्कार तीन स्तरों पर होना चाहिए।
*1) उन चीजों का बहिष्कार हो जिनका विकल्प हमारे पास उपस्थित हो । हो सकता है विकल्प उतना अच्छा ना हो पर इतना बुरा भी नहीं होगा कि उसका उपयोग न किया जा सके।*
*2) उन चीजों का बहिष्कार हो जिनका विकल्प तो नहीं पर वह इतनी आवश्यक भी नहीं कि जिसके बिना आपका जीवन रूक जाए या आपकी प्रगति रुक जाए या आपका कार्य अटक जाए।*
*3) यहां वह चीजें आती है जो आज जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है जैसे मोबाइल व कुछ इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं। जिसका समय तब आएगा जब देश से उपयुक्त चीजें पूर्णतः बहिष्कृत हो जाएंगी अर्थात आखरी पायदान पर और संभव है कि तब तक भारत भी इसका विकल्प खोज ले।*
अब जो चीन के बहिष्कार का विरोध करते हैं वह यह कहते हैं कि चीन का बहिष्कार करना है तो मोबाइल छोड़ो और यदि नहीं छोड़ सकते तो चीन का बहिष्कार बंद करो।
तो यह तो वही बात हो गई कि जब किसी ने आप से कहा कि मैं इंजीनियर बनूंगा तो आपने उसके सामने इंजीनियरिंग का कोई प्रश्न रख दिया और कहा कि इसे हल करो और यदि नहीं कर सकते तो इंजीनियर बनने का सपना छोड़ दो।
कहने का मतलब यह है कि मोबाइल व अन्य महत्वपूर्ण किन्तु चाइनीज़ चीजों का भी समय आएगा पर तब जब देश से अन्य सभी वस्तुएं बहिष्कृत हो चुकी होंगी और संभव है तब तक भारत को इनका विकल्प भी मिल जाये।
और रही बात हाथ में रखे मोबाइल को फेंकने की तो वह तो मूर्खता होगी क्योंकि जिसका पैसा आप पहले ही खर्च कर चुके हो उसे नष्ट करके आप सिर्फ अपना पैसा नष्ट करोगे।
अब जो चीन के बहिष्कार से इतने उत्तेजित हो रहे हैं उन्हें यही कहना है कि थोड़ा संयम रखो व अपने भारत पर विश्वास रखो और वैकल्पिक व अनावश्यक चीजों को दूर करना शुरु तो करो यह पूर्ण होगा तब तक आवश्यक चीजों का भी कोई विकल्प मिल जाएगा।
* और यदि आप सोचते हो कि जब मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीजों का विकल्प मिलेगा तब बहिष्कार शुरू करेंगे तो बधाई हो आप तो पैदा होते से ही इंजीनियर बनने की काबिलियत रखते हो।*
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