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कोरोना का डर

बाहर से आए चाचा जी को 
हो गया जुकाम,
कोरोना तो नही रे बाबा
मोहल्ले वाले परेशान,
क्या करे अब हमको तो
कुछ समझ नही आये,
घर बुलाये डॉ को या
अस्पताल ले जाये,
अस्पताल ले जाये लेकिन
 साथ में फिर कौन जाये?
साथ में जाये और कही 
कोरोना ना लग जाये,
चाचाजी तो ओहो रे बाबा
छींक छींककर हारे है,
पड़ोसी बोले संयम रखो
हम डॉ को बुला रे है,
चाचाजी को समझ ना आये
डॉ क्यूँ....? आ.....आ छू.....,
मुझको तो कुछ हुआ नही
मैं तो बिलकुल ठीक ही हूँ,
बोले मिस्टर तोषी जी
अरे चाचाजी ना घबराओ,
बाहर कहाँ से आये थे
बता दो हमसे ना छुपाओ,
देखो थोड़ी सी गलती से
हम कंटेन्मेंट में आएंगे,
आपके साथ साथ हम सब भी
कोरोना मरीज बन जायेंगे,
इतने में चाचीजी का भी
अंदर से आना हुआ,
छींक छींककर उनका भी तो
हो रहा है हाल बुरा,
घबराए पडोसी चाचा बोले
हे भगवान एक और कोरोना,
अब क्या होगा हम सब का?
तू ही हमे बचा लेना,
झल्लाकर चाचीजी बोले
रे मूर्खो तुम्हे अक्ल नही,
छोंक लगा है मिर्ची का
गन्ध तुम्हे क्या आती नही?
चश्मा मैने सुबह से आज
जाने किधर को रख दिया,
कम दिखता है इसी वजह से
भूल से मिर्ची को छोंक दिया,
ओ हो हो तो बात ये थी
हाय मन का बोझ अब उतर गया,
क्या करे चाचीजी?
इस कोरोना से मन डरा हुआ,
ना जाने कोरोना डर से
हम सारे कब छूटेंगे?
निडर होकर खांस सकेंगे
चैन से फिर हम छिकेंगे,
चैन से फिर हम छिकेंगे....।

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