*महादेव पर दूध, जल चढ़ाने के खिलाफ पटर - पटर बोलने वालों जरा सुनो ना...।*
बड़ी बड़ी होटलों में खाने का दुगना पैसा देने के बजाय घर का खाना खाकर उन पैसों से गरीबों को भोजन कराओ ना......।
बेफिजूल गाड़ी दौड़ाने की बजाय कभी पैदल चलकर तो कभी बस में सफर कर पेट्रोल के पैसे बचाओ और गरीब बच्चों को खिलौने दिलाओ ना....।
सिनेमा में बार-बार जाने के बजाय कभी तो वृद्ध आश्रम या अनाथ आश्रम हो आओ ना....।
अपनी महंगी जरूरतों से पैसे बचाकर एक ही सही पर प्रतिभाशाली गरीब बच्चे को पढ़ाओ ना....।
और अगर यह सब करने की हिम्मत नहीं तो अपनी जुबान पर लगाम लगाओ ना....।
धर्म के खिलाफ तो मुंह उठाकर आ जाते हो कभी झूठे दावे करने वाली कंपनियों के खिलाफ बोल कर दिखाओ ना....।
जिन महादेव को तुम काला पत्थर कहते हो उन्हीं के मंदिर में जब भंडारा होता है ना तो गरीब अमीरों के साथ बैठ कर खाते हैं जो यदि किसी दुकान, हॉटल, मॉल या सिनेमा के बाहर भी दिख जाए तो धुत्कार कर भगा दिए जाते हैं।
हम महादेव पर दूध चढाने में मानते हैं तो मंदिर के बाहर बैठे गरीब को कुछ ना कुछ देना भी जानते हैं।
भोजन में भी जीवन है, जल में भी जीवन है लेकिन सामान्य व्यक्तियों के लिए सिर्फ जल या सिर्फ भोजन में जीवन नही। उसी प्रकार, धर्म में भी पुण्य है, सत्कर्म में भी पुण्य है किन्तु सम्पूर्ण रूप से निःस्वार्थ भावों के बिना सिर्फ धर्म या सिर्फ सत्कर्म में पुण्य नही।
और तुम तो पाखंड के खिलाफ बोलते थे ना वाह रे वाह अब तो तुम धर्म के खिलाफ बोलने लगे।
पाखंड और धर्म में अंतर नही पहचानते क्या? और यदि तुम इस अंतर को जानने में सक्षम नही हो तो.....
*आवाज नीचे...।*
*"मैं अन्धविश्वास और पाखंड के खिलाफ हूँ,"*
*"लेकिन धर्म के साथ हूँ...।"*
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