किसी को कहते सुना की आज विज्ञान के कारण हमें बड़ी बड़ी बीमारियों का पता चला वरना पहले के लोग तो जान ही नही पाते थे।
तो एक बात समझ में नही आयी की पहले के लोग जब जानते नही थे फिर भी 90 से 100 साल हष्ट पुष्ट जी जाते थे और आज की हालत तो आप जानते ही है। आज विज्ञान ने बीमारियों का पता तो लगाया पर ये बीमारियां क्यों हो रही है इसके बारे में पता नही लगाया?
या यु कहु इन बीमारियों का फिर वह छोटी हो या बड़ी उनका कारण भी विज्ञान ही है। आज हम चाँद तक तो पहुँच गये पर ये भूल गए की हम रहते तो पृथ्वी पर है जहाँ हवा में उड़ना सम्भव नही फिर वह शारीरिक तौर पर हो या मानसिक तौर पर।
हमने तरक्की के नाम पर अपनी आदते इस हद तक बिगाड़ ली है कि अब उन्हें सुधारना हमारे स्वयं के वश में भी नही रहा। विज्ञान की तरक्की के नाम पर हम अपनी आँखों में चकाचौन्ध बढ़ाते जा रहे है और देखना भूल रहे है की उस चकाचौन्ध के पीछे का अँधियारा हमारे जीवन को घेर रहा है, वह जीवन जिसके पीछे ही हम है।
विज्ञान की तरक्की गलत है मैं यह नही कहती क्योकि मैं भी नवीनता (crativity) में विश्वास रखती हूँ किन्तु नवीनता में हम इतने भी ना खो जाए की हमारा भविष्य खतरे में पड़ जाए।
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