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वास्तविक दान व उससे मिलने वाला सुख- लघुकथा

 भिक्षां देहि...
भिक्षां देहि.....
 साधु ने दो बार आवाज लगाई लेकिन कोई बाहर नहीं आया
किंतु इस घर से उन्हें रोज भिक्षा मिलती है तो उन्होंने सोचा एक बार और आवाज लगाऊँ
भिक्षां देहि.....
फिर भी कोई बाहर नही आया तो वो साधु जाने लगे
इतने में एक व्यक्ति झल्लाकर बाहर निकला और बोला क्या है?

साधु विनम्रता से बोले- क्या बात है बेटा बड़े दुःखी दिखाई देते हो? चिंता मत करो ईश्वर सब ठीक करेंगे..।

वो व्यक्ति फिर झल्लाया और बोला- कौन ईश्वर? कैसे ईश्वर? कहाँ के ईश्वर? मैंने ईश्वर में मानना छोड़ दिया है बहुत भक्ति कर ली कुछ नही मिला अब और नही।
मैंने अभी अभी हिसाब लगाया साल भर में मैंने जितना दान दिया उसका दुगुना होकर मुझे मिलना चाहिए था लेकिन आधा भी नही मिला।

साधु हँसे और बोले- बेटा.... तुमने सालभर कितना दान किया है उसका नही कितना धन व्यर्थ किया है उसका हिसाब लगाया है क्योकि फल उस दान का मिलता है जो श्रद्धा व निःस्वार्थ भाव से दिया गया हो पर तुमने तो एक एक रुपये का हिसाब लगाया है और बदले में दुगुना मिला या नही उसकी गिनती भी कर रहे हो तो तुम्हारा दान तो व्यर्थ हुआ ही समझो..।

वह व्यक्ति बोला- अच्छा माना मैंने श्रद्धा से दान नही किया है लेकिन मेरी बीवी वो तो रोज भोजन बनाकर पहले भगवान को खिलाती है इतने साधु आते है उन्हें धान देती है मेरे बापूजी रोज मन्दिर जाते है और नियम से मन्दिर जाए बिना चाय तक नही पीते और मेरे बच्चे भी उनके नक्शे कदम पर चलकर भगवान भगवान करते है...ये सब तो श्रद्धा से करते है ना फिर मैं इतना दुःखी क्यो हुँ?

साधु मुस्कुराए और बोले- बेटा तुमने अभी अभी बताया कि तुम कितने सुखी हो क्योकि जिस घर मे इतना अच्छा वातावरण हो जहाँ स्त्री इतनी विनम्र हो, बुजुर्ग का साथ हो, बच्चे आदर्शवादी व संस्कारी बनने की शिक्षा स्वेच्छा से ले रहे हो उस घर से सूखी घर और कौन सा होगा?

बेटा हिसाब किताब रखना अच्छी बात है लेकिन यदि ईश्वर से हिसाब किताब मांगोगे और यदि उन्होंने दे दिया तो तुम स्वयं से नजर नही मिला पाओगे इसलिए दान करो तो श्रद्धा से और पैसो से हटकर भी कुछ सुख होता है उन्हें देखने की कोशिश करो वरना पैसो के सुख को प्राप्त करने की इच्छा में अनमोल सुख गवां दोगे..। बाकी तो सब ईश्वर की लीला है, हर हर महादेव...। 
इतना कहकर साधु निकल गए व वह व्यक्ति भी असमंजस में अंदर चला गया और हम सब अब ये समझने की कोशिश करे कि वास्तविक दान व उससे मिलने वाला सुख और लाभ क्या होता है?
हर हर महादेव...।


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